सराफा कारोबारियों की हड़ताल के समर्थन में आयोजित उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल का जनपद बंद सोमवार को पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ। सराफा कारोबारियों ने ही दुकानें बंद करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
नतीजा यह रहा कि थोड़ी-बहुत जो दुकानें सुबह नहीं खुलीं, वे भी दोपहर से पहले तक पूरी तरह खुल गईं। और तो और जिला मुख्यालय पर ही हड़ताल का कोई असर देखने को नहीं मिला।
सराफा कारोबारियों ने भी इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई कि अन्य कारोबार से जुड़े व्यापारियों के साथ मिलकर सभी प्रकार की दुकानों की बंदी तय करते हुए बड़ा संदेश दिया जा सके। गौरतलब है कि उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने बीते दिनों सराफा कारोबारियों की हड़ताल के समर्थन में 4 अप्रैल को प्रदेश व्यापी बंदी का आह्वान किया था।
इसे देखते हुए जिले में भी बंदी की तैयारियां की गई थीं। हालांकि जिला मुख्यालय के सराफा कारोबारियों ने इस बंदी से पहले ही अपनी लगभग तीन सप्ताह पुरानी हड़ताल समाप्त करते हुए दुकानें खोल दी थीं। इस बीच यह प्रांत व्यापी बंदी घोषित हो गई।
बंदी को सफल बनाने के लिए जिला मुख्यालय पर लाउडस्पीकर से प्रचार-प्रसार भी एक दिन पहले कराया गया लेकिन उसका कोई असर सोमवार को हड़ताल के दौरान देखने को नहीं मिला। दरअसल संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने न तो जिला मुख्यालय व ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख व्यापारियों से व्यक्तिगत संपर्क करने की जरूरत महसूस की और न ही कोई कार्य योजना ही तैयार की।
इन सब के बीच लंबी हड़ताल के चलते ऊब चुके सराफा व्यवसायी भी आधे-अधूरे मन से ही सोमवार को होने वाली हड़ताल में अपनी-अपनी दुकानें बंद करने को तैयार हुए थे। बंदी के आह्वान के बीच हालांकि सोमवार सुबह जिला मुख्यालय के विभिन्न क्षेत्रों में दर्जनों दुकानों का ताला निर्धारित समय पर नहीं खुला लेकिन बाद में अन्य दुकानों के खुलते ही सभी दुकानें कुछ देर में ही तड़ातड़ खुल गईं।
इनमें सराफा कारोबारी ही सबसे आगे दिखाई दिए। बंदी की असफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दोपहर होने से पहले ही जिला मुख्यालय पर लगभग सभी दुकानें अपनी रौ में पूरी तरह आ चुकी थीं।
जलालपुर प्रतिनिधि के अनुसार तहसील मुख्यालय पर यूं तो साप्ताहिक बंदी के चलते सन्नाटा था लेकिन तहसील क्षेत्र की अन्य बाजारों में हड़ताल का कोई असर नहीं दिखा। टांडा प्रतिनिधि के अनुसार सराफा कारोबारियों की दुकानें पहले की तरह जरूर बंद थीं लेकिन अन्य सभी दुकानें नित्य की तरह ही खुलीं।
भीटी व आलापुर प्रतिनिधि के अनुसार भी बंदी का कोई असर तहसील क्षेत्रों में दिखाई नहीं दिया। उधर, उद्योग व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष शिवकुमार वर्मा ने बताया कि बंदी का मिलाजुला असर रहा है लेकिन सराफा कारोबारियों ने ही ठीक सेे साथ नहीं दिया। संगठन ने तो बंदी से पहले दो दिन तक लाउडस्पीकर से प्रचार-प्रसार कराकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह भी किया।