मानसून के पहली पहली बारिश ने शहर में जलनिकासी की पोल खोल दी। नाले नालियों का गंदा पानी जगह-जगह सड़कों पर बहने लगा। कई मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बन गई। उधर बारिश से एक तरफ जहां धान किसानों के चेहरे खिल उठे, वहीं भीषण गर्मी से जूझ रहे आम लोगों को भी राहत मिली है।
बीते कुछ दिनों से आसमान पर उमड़-घुमड़ रहे काले बादल गुरुवार रात जमकर बरसे। यह सिलसिला शुक्रवार सुबह तक चलता रहा। झमाझम हुई मानसून की पहली बारिश ने नाले नालियों की साफ-सफाई की पोल खोलकर रख दी। नाले-नालियों की समुचित साफ सफाई न होने से गंदा पानी सड़कों पर बहने लगा।
जगह जगह जलभराव हो गया। लोगों को अवागमन में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अकबरपुर फैजाबाद रोड, सब्जी मंडी, बस स्टेशन क्षेत्र, कलक्ट्रेट के निकट, कोतवाली के निकट, कृषि भवन के निकट नाले-नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बहने लगा। कृषि भवन, कलक्ट्रेट के निकट व अकबरपुर फैजाबाद मार्ग व अकबरपुर टांडा मार्ग पर नाले नालियों का गंदा पानी जगह जगह एकत्र हो गया।
सबसे अधिक समस्या दो पहिया वाहन चालक व पैदल चलने वालों को हुई। जलभराव के चलते अकबरपुर टांडा मार्ग पर एक ट्रक धंस गई। इससे काफी देर तक आवागमन बाधित रहा।
बारिश होने से धान किसानों के चेहरे खिल उठे। धान की बेड़न लगाने के कार्य ने गति पकड़ लिया है। अकबरपुर के किसान राघवेंद्र कुमार व हरीश वर्मा ने कहा कि यदि इसी प्रकार से दो चार दिन और बारिश हो जाए तो इसका व्यापक लाभ धान किसानों को मिलेगा। बेड़न लगाने के खेत तैयार करने के लिए बारिश की आवश्यकता थी।
टांडा के किसान सतीष शर्मा व अमरनाथ सिंह ने कहा कि बारिश से धान की बेरन लगाने में आसानी होगी। हालांकि बारिश ने जहां धान किसानों के चेहरे पर चमक ला दी वहीं मेंथा किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उत्पन्न हो गईं। उनका कहना है कि बारिश के चलते पेराई का कार्य पिछड़ रहा है।