अंबेडकरनगर। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण में लगी कार्यदायी संस्था ने मनमानी करते हुए कटारगढ़ रजबहा को दो किलोमटर दूरी तक क्षतिग्रस्त कर डाला। मनमानी करते हुए इस दूरी के क्षेत्रफल में लगभग 20 फिट गहराई तक मिट्टी निकालकर हाईवे के निर्माण में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। सिंचाई विभाग की आपत्ति के बावजूद मिट्टी के अवैध खनन पर रोक नहीं लग रही है।
सिंचाई विभाग ने अब राजेसुल्तानपुर थाने में बाकायदा तहरीर देकर केस दर्ज करने को कहा है। सिंचाई विभाग के अनुसार नहर को क्षतिग्रस्त किए जाने से कटान का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि अंबेडकरनगर की आलापुर तहसील के कुछ क्षेत्रों से होकर गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण हो रहा है। निर्माण का जिम्मा कार्यदायी संस्था निजी कंपनी को सौंपा गया है। एजेंसी ने निर्माण के लिए कटारगढ़ रजबहा को करौंदी मिश्र गांव के निकट पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर डाला है। सिंचाई विभाग के अनुसार माइनर से मिट्टी निकालकर उसका प्रयोग हाइवे निर्माण में किया जा रहा है।
इस बारे में कार्यदायी संस्था के प्रबंधक से कई बार आपत्ति जताई गई, लेकिन अवैध ढंग से मिट्टी खनन का कार्य जारी रहा। मशीनों से की जा रही खोदाई में इतनी गहराई तक मिट्टी निकाल ली जा रही है कि नीचे से कई जगह पानी भी रिसने लगा है। अवैध खनन से नहर में आगामी दिनों में कटान का भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
इसे देखते हुए सिंचाई खंड टांडा के अवर अभियंता रवि प्रकाश अग्रहरि, जिलेदार द्वितीय अवधेश सिंह यादव व सींचपाल राजमनीष नरायण ने संयुक्त रूप से राजेसुल्तानपुर थाने में कंपनी के विरुद्ध तहरीर दी है। इसमें कंपनी के साथ ही उसके प्रतिनिधि व अन्य के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की अपेक्षा प्रकट की गई है, जिससे राजकीय संपत्ति का नुकसान रुक सके और नुकसान की भरपाई भी कराई जा सके।
तहरीर में कहा गया है कि कार्यदायी संस्था ने कटारगढ़ रजबहा के किलोमीटर 30 से 32 के मध्य नहर को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। लगभग 20 फिट गहराई से मिट्टी निकाली जा रही है। निरंतर सरकारी रजबहा/नहर को क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। इससे सरकारी संपत्ति को स्थायी नुकसान हो रहा है। साथ ही इस कृत्य से किसानों की सिंचाई में भी बाधा उत्पन्न होगी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर जरूरी छानबीन शुरू कर दी है। हालांकि समाचार प्रेषण तक केस नहीं दर्ज हो पाया है।
कार्यदायी संस्था की मनमानी सिर्फ नहर को क्षतिग्रस्त करने तक ही सीमित नहीं है। नहर के किनारे लगे पेड़ों को कार्यदायी संस्था ने तहस-नहस कर दिया है। दरअसल नहर की खोदाई जेसीबी से कराई गई है। मशीन को नहर तक पहुंचाने के लिए हरे पेड़ों को मनमाने ढंग से उखाड़ दिया गया। मशीनों के जरिए उखाड़े गए पेड़ों को बाद में ग्रामीण उठा ले गए। स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि हरे पेड़ों की कटान मामले में वन अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया जाए। इस बारे में राजेसुल्तानपुर एसओ पीएन तिवारी ने बताया कि मामले में तहरीर मिली है। संबंधित उपनिरीक्षक को जांच व अग्रिम कार्रवाई के लिए कहा गया है।
सिंचाई खंड टांडा के अधिशाषी अभियंता वीसी लाल ने बताया कि मनमाने ढंग से रजबहा को क्षतिग्रस्त करने तथा मिट्टी निकाल लेने के मामले में राजेसुल्तानपुर थाने में तहरीर दे दी गई है। केस दर्ज होगा। सभी जरूरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।