प्रमन श्रीवास्तव
अंबेडकरनगर। जेल की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए जेल परिसर में सामंजस्यपूर्ण कॉल ब्लॉकिंग टावर लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस अत्याधुनिक तकनीक से लैस टावर की लागत करीब 1.52 करोड़ तय की गई है, जिसका बजट शासन से स्वीकृत हो गया है। यह टॉवर लगने से जेल के भीतर किसी भी प्रकार का मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करेगा। अंबेडकरनगर समेत छह जिलों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप से शुरू किया जाएगा।
जिला कारागार अंबेडकरनगर में आमतौर पर 700 से 720 बंदी रहते हैं। कई बंदियों को यहां प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित भी किया जाता है। करीब आठ माह पूर्व शासन से जेल की सुरक्षा के लिए एक सर्वे कराया गया था, जिसके बाद कॉल ब्लॉकिंग टाॅवर लगाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। अंबेडकरनगर के साथ जिला कारागार लखनऊ, चित्रकूट, आजमगढ़, केंद्रीय कारागार बरेली और कासगंज को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित किया गया है। यह टॉवर स्थापित होते ही जेल के भीतर से मोबाइल कॉल, मैसेज और इंटरनेट सेवाएं पूर्ण रूप से बाधित हो जाएंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बंदी जेल के भीतर से मोबाइल फोन के जरिये आपराधिक गतिविधियों, धमकी, वसूली या किसी अन्य गैरकानूनी संपर्क में शामिल न हो सकें।
अब तकनीक से होगा नियंत्रण
अभी तक मोबाइल या उपायों को रोकने के लिए मैनुअल जांच का ही सहारा था। इस नई व्यवस्था के तहत एक ऐसा टावर लगाया जाएगा, जो विशेष सेल्युलर नेटवर्क बाधा प्रणाली के माध्यम से जेल परिसर के भीतर किसी भी मोबाइल नेटवर्क को काम नहीं करने देगा। यह प्रणाली केवल जेल परिसर को कवर करेगी ताकि आसपास के आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पूर्व में कारागार प्रशासन की ओर से सर्वे कराया गया था। मंजूरी मिलने के संबंध में अभी पत्र नहीं मिला है। शासन के निर्देशानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
- शशिकांत मिश्र, जेल अधीक्षक