अंबेडकरनगर। पराली जलाते पाए जाने वाले किसानों को इस बार भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। ऐसे किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली अगली किस्त से वंचित कर दिया जाएगा। साथ ही उन्हें अनुदान पर मिलने वाले बीज, उर्वरक और कृषि उपकरणों की सुविधा से भी वंचित किया जा सकता है।
पिछले वर्ष जिले में पराली जलाने की 100 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई थीं। उन मामलों में विभाग ने जुर्माना भी वसूला था। इस बार पराली जलाने पर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। जिले में वर्तमान में चार लाख से अधिक किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं। इन दिनों किसान धान की कटाई और गेहूं की बोआई की तैयारी में जुटे हैं। धान कटने के बाद बड़ी संख्या में किसान पराली को खेतों में ही जला देते हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। अब तक दो किसानों पर पराली जलाने का जुर्माना लगाया जा चुका है। विभाग ने चेतावनी दी है कि दोबारा गलती दोहराने वालों की सभी अनुदान योजनाएं बंद कर दी जाएंगी।
विभाग ने दिए विकल्प
उप कृषि निदेशक डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि किसान पराली जलाने के बजाय कंबाइन हार्वेस्टर में सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) का उपयोग करें। इसके विकल्प के रूप में स्ट्रारीपर, स्ट्रारेक, बेलर, मल्चर, पैडी स्ट्राचॉपर, श्रव मास्टर, रोटरी स्लैशर और रिवर्सेबल एमबी प्लाऊ जैसे यंत्रों से पराली का प्रबंधन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संचालक एसएमएस की व्यवस्था कराते हुए ही फसल कटाई करें, अन्यथा संबंधित हार्वेस्टर सीज कर दिया जाएगा।