अंबेडकरनगर। हल्की बूंदाबांदी, मंद समीर और नदियों-तालाबों के तटों पर झिलमिलाती आरती की लौ के बीच मंगलवार की सुबह जिले भर के घाट छठ मइया की भक्ति से सराबोर हो गए। अकबरपुर के तमसा घाट पर हजारों व्रतधारिणी महिलाओं ने जल में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। सूर्यदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना की गई।
घाटों पर गूंजते पारंपरिक लोकगीतों ने वातावरण को पूरी तरह भक्ति और भावनाओं से ओतप्रोत कर दिया। सूप में सजे फल, दीपक, ठेकुआ, सुपली और गन्ने की सुगंध ने पूरे वातावरण को पावन बना दिया। अकबरपुर के तमसा नदी स्थित गायत्री मंदिर घाट पर सुबह की गुलाबी ठंड में व्रतधारिणी महिलाओं के चेहरों पर अद्भुत तेज झलक रहा था। शालिनी श्रीवास्तव, रिंकी मद्धेशिया, संध्या शुक्ला, सन्नो, पुष्पा, नैना, रिषिका गोयल समेत सैकड़ों महिलाएं पारंपरिक परिधान में पूजन के लिए पहुंचीं। उन्होंने वेदी पर पुष्प, फल और नारियल अर्पित कर पूजन किया, तत्पश्चात जल में उतरकर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके, ऊंके पहिले पहिल हम कईनी छठी मइया व्रत तोहार, कबहुं ना छूटी छठि मइया जैसे लोकगीतों की मधुर गूंज से माहौल अलौकिक हो उठा। महिलाएं सिर पर चुनरी ओढ़े, छाता थामे बूंदाबांदी में भीगती रहीं, लेकिन उनकी आस्था की लौ तनिक भी नहीं डिगी। मिट्टी के दीपक, लोकगीतों की तान और सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता की भावना ने घाटों को भक्ति, सौंदर्य और संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।
अन्य घाटों पर भी उमड़ा जनसैलाब
तमसा के अलावा टांडा और राजेसुल्तानपुर में सरयू नदी के घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दीपों की झिलमिलाहट और छठ गीतों की गूंज ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। आलापुर, जलालपुर, श्रवण धाम, बसखारी और जहांगीरगंज क्षेत्रों में भी त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
व्यवस्थाओं में दिखा प्रशासन का अनुशासन
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने टांडा के हनुमानगढ़ी और राजघाट का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए। एसपी अभिजीत आर. शंकर ने एएसपी पश्चिमी हरेंद्र कुमार के साथ अकबरपुर के विभिन्न घाटों पर व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रतीक्षा सिंह, सीओ सिटी नीतीश कुमार तिवारी और इंस्पेक्टर श्रीनिवास पांडेय श्रद्धालुओं को व्यवस्थित करने और सुरक्षा प्रबंधन में लगे रहे।