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बसपा विधायक के बेटे ने खुद को मारी गोली

Sun, 12 Mar 2017 09:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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gun - फोटो : symbolic
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बसपा विधायक लालजी वर्मा के बेटे विकास वर्मा ने रविवार को अकबरपुर स्थित प्रिटिंग प्रेस में खुद को लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोली मार ली। नाजुक हालत में विकास को लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। विकास ने खुद को गोली मारने से पहले अपना फेसबुक स्टेटस अपडेट किया, जिसमें उसने बीमारी से ऊबकर ऐसा कदम उठाने की बात लिखी है।
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पूर्व मंत्री व कटेहरी के नवनिर्वाचित विधायक लालजी वर्मा का इकलौता पुत्र विकास वर्मा मोहिउद्दीनपुर गांव की बजाय पिछले तीन दिनों से पेट संबंधी बीमारी का इलाज कराने के लिए अकबरपुर में अपने प्रिंटिंग प्रेस परिसर में रह रहा था। रविवार को उसके दो मित्र नवीन व सुभाष भी पहुंच गए।

दोपहर में खाना खाने के बाद नवीन व  सुभाष ऊपरी भाग स्थित कमरे में सोने चले गए, जबकि विकास नीचे कमरे में अकेला रह गया। दोपहर करीब दो बजे विकास के कमरे से गोली चलने की आवाज आई। जब दोस्त वहां पहुंचे तो वह बिस्तर पर खून से लथपथ पड़ा था जबकि रिवॉल्वर नीचे गिरी हुई थी। ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. हैदर अब्बास ने बताया कि गोली कनपटी में लगी है जो जबड़े में फंस गई है।
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डॉ. हैदर ने बताया कि सीटी स्कैन से पता चला है कि गोली से दिमाग को कोई नुकसान नहीं हुआ है। विकास होश में है और उसकी हालत स्थिर है। विकास ने फेसबुक पर अपडेट किया-लोग मुझे बहुत चाहते हैं और मैं भी सभी से बहुत प्यार करता हूं। मगर स्वास्थ्य खराब होने के कारण न किसी से मिल पाता हूं और अक्सर फोन नहीं रिसीव कर पाता हूं।

ऐसी जिंदगी की कल्पना नहीं की थी। एक दो दिन या महीने की बात होती, तो किसी तरह जी लेता, लेकिन रोज रोज मर के जीने की बजाय एक बार मर जाना उचित समझता हूं। किसी गलती के लिए विकास ने माफी भी मांगी और परिवार में सामंजस्य बनाकर रखने की सीख भी दी। अपने दोनों बेटों की पढ़ाई पर ध्यान  देने की अपील करते हुए कहा कि मेरे मरने पर उदास न होइएगा।

अपनी तकदीर से अब लड़ नहीं पा रहा हूं। जो आया है उसे  जाना ही पड़ता है। दोस्तों के लिए लिखा कि मेरी परिस्थितियों को समझकर मेरे परिवार का ढांढस बधाइएगा। उनकी आखों में आंसू मत आने दीजिएगा।

विकास ने आगे लिखा कि लोग कहते हैं कि आत्महत्या कमजोर लोग  करते हैं। हो सकता है यह सही हो, लेकिन अब और नहीं लड़ा जा रहा। बहुत जगह  इलाज कराया, कोई सुधार नहीं होता दिख रहा। अंत में लिखा कि मजबूरी के साथ मुझे जीना नहीं आता। 
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