भ्रष्टाचार रोकने के लिए भले ही आम लोग जनसूचना अधिकार अधिनियम को सशक्त माध्यम मानते हों, लेकिन इसका पालन सरकारी विभागों में होता नहीं दिखाई दे रहा है। विभाग से जुड़ी सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदकों को महीनों कार्यालयों का चक्कर काटना पड़ता है, इसके बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं हो पाती है।
जनसूचना अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करने का मामला इस बार बेसिक शिक्षा विभाग में आया है। तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी पर राज्य सूचना आयोग ने 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। सुनवाई के लिए 28 अगस्त को समय निर्धारित किया है।
सिकंदरपुर निवासी महेंद्र कुमार ने गत 3 मई 2011 को बेसिक शिक्षा अधिकारी से प्राथमिक विद्यालय सिकंदरपुर से जुड़ी पांच बिंदुओं पर जन सूचना मांगी थी। पूछा था कि प्राथमिक विद्यालय सिकंदरपुर में वर्ष 2004 से 2011 तक के बीच किन लोगों ने प्रधानाध्यापक, शिक्षक व शिक्षामित्र के पद पर कार्य किया। 15 अक्तूबर वर्ष 2004 से 3 मई 2011 तक किन शिक्षामित्रों को कितना मानदेय दिया गया।
इसी तरह कुल पांच बिन्दुओं पर सूचना मांगी थी। बेसिक शिक्षा विभाग ने महेंद्र को जनसूचना के तहत जानकारी उपलब्ध कराने की बजाए टाल मटोल करता रहा। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की उदासीनता को देखते हुए उन्होंने मामले की शिकायत राज्य सूचना आयोग से की।
राज्य सूचना आयोग के स्वदेश कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन बीएसए दलसिंगार यादव पर 19 अप्रैल 2014 को समय से सूचना न देने के आरोप में 20 हजार जुर्माना लगाते हुए एक माह के अंदर सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
निर्धारित समय के बाद सूचना न मिलने पर महेंद्र ने फिर आयोग से सूचना दिलाने की मांग की। इस पर आयोग ने जुर्माने की रकम बढ़ाकर 25 हजार करते हुए 28 अगस्त को सुनवाई की तिथि निर्धारित की है। निर्धारित तिथि को सूचना उपलब्ध नहीं होती है तो आयोग जुर्माने की रकम वसूल करने का आदेश जारी करते हुए मामले का निपटारा कराएगी।