जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर परीक्षा केंद्रों पर बोलकर नकल कराई गई। विद्यालयों में तैनात स्टेटिक मजिस्ट्रेट भी साइलेंट नकल पर अंकुश नहीं लगा सके। इतना ही नहीं, नकल रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने जिन पंाच सचल दलों का गठन किया था, उनमें दो टीमें वाहन उपलब्ध न होने पर कहीं भी नहीं जा सकीं।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा गुरुवार से प्रारंभ हुई। प्रथम पाली में हाईस्कूल के हिंदी विषय की परीक्षा 181 परीक्षा केंद्रों पर सुबह साढ़े सात बजे से शुरू हुई। परीक्षा को लेकर छात्र छात्राओं में गहमागहमी रही। परीक्षा प्रारंभ होने के एक घंटा पहले ही परीक्षार्थी संबंधित परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए।
परीक्षा प्रारंभ हुई तो नकलविहीन परीक्षा कराने की प्रशासन की सभी तैयारियां धरी की धरी रह गईं। सभी परीक्षा केंद्रों पर दो दो स्टेटिक मजिस्ट्रेट तैनात तो किए गए थे, लेकिन ज्यादातर परीक्षा केंद्रों पर बाकायदा बोलकर नकल कराई गई। अकबरपुर जलालपुर मार्ग पर स्थित परीक्षा केंद्रों पर तो पर्ची से नकल कराई गई।
इसके अलावा जलालपुर, आलापुर, टांडा व भीटी क्षेत्र में स्थित अधिकांश परीक्षा केंद्रों पर साइलेंट नकल का बोलबाला रहा। जिला मुख्यालय स्थित एक परीक्षा से परीक्षा देकर बाहर निकले हाईस्कूल के परीक्षार्थी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मजिस्ट्रेट की तैनाती के बाद भी बाकायदा बोलकर उन लोगों को नकल कराई गई।
कुछ ऐसा ही हाल द्वितीय पाली में भी रहा। इंटरमीडिएट के हिंदी प्रथम प्रश्रपत्र की परीक्षा में प्रथम पाली की तरह नकल माफिया शिक्षा विभाग से दो हाथ आगे ही रहे। नकल माफिया के मजबूत नेटवर्क के आगे शिक्षा विभाग पूरी तरह असहाय दिखा।
अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सचल दल के परीक्षा केंद्र पर पहुंचने से पहले ही उनके आने की सूचना केंद्र तक पहुंच जा रही थी। इससे जब टीम वहां पहुंचती थी, तो वहां सबकुछ ओके ही मिलता था।