आलापुर (अंबेडकरनगर)। निखिल निवास परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत संगीतमयी कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को पंडाल भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर रहा। नैमिषारण्य जानकीकुंड अयोध्या बड़ी छावनी के महंत मनमोहन दास महाराज ने भीष्म स्तुति, कुंती स्तुति और श्रीकृष्ण–अर्जुन संवाद पर आधारित गीता उपदेश का वर्णन किया।
महंत ने कहा कि धर्म वही है जो कर्तव्य-पालन से जुड़ा हो, और भक्ति वही जो विपत्ति में भी भगवान के स्मरण को न छोड़े। उन्होंने भीष्म पितामह के सत्य और प्रतिज्ञा के मार्ग को आदर्श बताते हुए कहा कि जीवन में धर्म पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
कुंती स्तुति के माध्यम से उन्होंने बताया कि संकट मनुष्य को भक्ति की सर्वोच्च अवस्था तक ले जाता है। गीता उपदेश पर उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्काम कर्म, समभाव और सत्य ही जीवन का वास्तविक धर्म है।
कथा के दौरान संगीतमय भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वैदिक स्वर, वाद्य-ध्वनियों और जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान रहा। छोटे बच्चों ने भी भजन और आरती में सहभागिता करते हुए भगवान के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की। आयोजक अशोक कुमार शुक्ला, बिभु शुक्ला, पवन कुमार वर्मा, हरिवंश तिवारी सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।