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मीठी गोली के सहारे बेहतर इलाज की कवायद

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अंबेडकरनगर। संसाधनों की कमी के कारण जिले में संचालित होम्योपैथिक अस्पताल बदहाली का शिकार बने हैं। बिना चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ के संचालित इन अस्पतालों में मरीजों को इलाज के नाम पर सिर्फ मीठी गोली मिल रही है। इनमें से 17 होम्योपैथी अस्पताल जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी परिसर में उधार के कमरों में जबकि दो अन्य बेलापरसा व कुर्चा पंचायत भवन में संचालित हो रहे हैं। इतना ही नहीं अकबरपुर व टांडा के शहरी अस्पताल में डाक्टर तो रफीगंज व हीड़ी पकड़िया में फार्मासिस्ट की तैनाती तक नहीं है। इन जिला स्तरीय होम्योपैथी अस्पतालों को सालों से अपने भवन का इंतजार है।
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स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हर पैथी के इलाज को चुस्त दुरुस्त बनाने का दावा तो बढ़ चढ़कर किया जाता है लेकिन जमीनी तौर पर इसे अमल में नहीं लाया जा रहा। इसका सीधा प्रमाण जिले में बदहाली का शिकार बने होम्योपैथी अस्पतालों से मिलता है। सालों से इंतजार के बाद भी जिले के 19 होम्योपैथिक अस्पतालों के पास अब तक न तो अपना भवन है और न ही इलाज के लिए अन्य जरूरी संसाधन।
इन होम्योपैथिक अस्पतालों में चिकित्सकों के 20 पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष अभी तक 16 पदों पर ही तैनाती हुई है जबकि डाक्टरों के चार पद बीते लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसके साथ ही अस्पताल चलाने के लिए जरूरी फार्मासिस्ट व अन्य सहायक स्टाफ के पद भी काफी समय तैनाती न हो पाने के कारण खाली पड़े हैं। ऐसे में इन अस्पतालों में चिकित्सकों को मरीजों का इलाज करने के साथ ही खुद ही दवा भी वितरित करना पड़ रही है। इसका खामियाजा इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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रिक्त पदों को भरने के लिए भेजा पत्र
जिला स्तरीय अस्पतालों में रिक्त चल रहे चिकित्सक व फार्मासिस्ट के पदों पर तैनाती के लिए कई बार मुख्यालय को पत्र भेजा जा चुका है। मुख्यालय स्तर से प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इन पदों पर तैनाती होगी। साथ ही पंचायत भवन में संचालित दोनों अस्पतालों को अपने भवन में शिफ्ट कराने के लिए भी पत्र भेजा गया है।
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डॉ. विजय प्रकाश वर्मा, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी
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