लंबी जद्दोजेहद एवं संघर्ष के बाद प्रदेश सरकार ने हाल ही में शिक्षामित्रों को बगैर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण किए ही सहायक अध्यापक पद पर तैनाती की हरी झण्डी दी थी। इससे शिक्षामित्रों में खुशी की लहर दौड़ गई थी।
समायोजन प्रक्रिया प्रारंभ हुई, तो जिले के विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों में तैनात 2 हजार 150 शिक्षामित्रों के सापेक्ष दो चरणों में 1 हजार 600 शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर दिया गया।
शेष बचे साढ़े 500 शिक्षामित्रों की सहायक पद पर तैनाती किए जाने की तैयारी चल ही रही थी कि इसी बीच टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में समायोजन प्रक्रिया के विरुद्ध याचिका दायर कर दी।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया और समायोजन संबंधित पत्रावली हाईकोर्ट की इलाहाबाद खण्ड पीठ को भेज दी। शनिवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद तैनाती को ही रद्द कर दिया। फैसले में कहा गया कि प्रदेश सरकार शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ा सकती है, लेकिन उनका सहायक अध्यापक पर समायोजन नहीं कर सकती।
कोर्ट के इस फैसले से शिक्षामित्र से बने सहायक अध्यापकों व सहायक अध्यापक बनने की लाइन में खड़े शिक्षामित्रों को तगड़ा झटका लगा। पूरे दिन शिक्षामित्रों में कोर्ट के फैसले को लेकर चर्चा होती रही। वे लगातार विभिन्न शिक्षामित्र संगठनों के पदाधिकारियों से दूरभाष पर यह जानकारी करने में लग गए कि अब आगे की रणनीति क्या होगी।
प्रथम चरण में 1 अगस्त 2014 को 632 शिक्षामित्रों को समाजित कर सहायक अध्यापक पद पर तैनाती दी गई। उन्हें वेतन भी मिलने लगा। दूसरे चरण 28 मई 2015 को 968 शिक्षामित्रों का समायोजन हुआ। बताया कि शिक्षामित्रों के संगठन व सरकार के बीच वार्ता चल रही है। शीघ्र ही इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
केके दुबे, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षामित्र संघ