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मुंसिफ मजिस्ट्रेट की तैयारी छूटी तो केले की खेती कर कमाए लाखों, जीते 5 बड़े अवॉर्ड

Sun, 01 Nov 2020 12:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अंबेडकरनगर
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अंबेडकरनगर के पिंगिरियांवा में केले की बेहतर खेती करने वाले देवनारायण पाण्डेय। - फोटो : अमर उजाला
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भीटी। इलाहाबाद में मुंसिफ मजिस्ट्रेट बनने की तैयारी छोड़कर सब्जी व केले की खेती कर पांच पुरस्कार जीतने वाले युवा किसान देवनारायण पाण्डेय तरक्की व प्रेरणा की गाथा लिख रहे हैं। वर्ष 2010 में पिता की ब्रेन हैमरेज के चलते मौत हो गई तो परिवार के सामने आर्थिक संकट का पहाड़ खड़ा हो गया। नौकरी की तैयारी के सिलसिले में बाहर रहने के बजाए घर वापस लौटना पड़ा। इसके बाद सब्जी व केले की खेती को लेकर मन में आए लगाव ने सब कुछ बदलकर रख दिया। उनकी न सिर्फ एक प्रगतिशील किसान के रूप में पहचान बन गई बल्कि एक के बाद एक पांच पुरस्कार भी झोली में आ गए हैं।
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बात हो रही है कि भीटी तहसील क्षेत्र के पिंगरियावां गांव निवासी स्व. रामजग पाण्डेय के सबसे छोटे पुत्र देवनरायण पाण्डेय की। एलएलबी करने के उपरांत इलाहाबाद में मुंसिफ मजिस्ट्रेट की नौकरी के लिए कोचिंग करने लगे। वर्ष 2008 में ब्रेन हैमरेज होने के कारण पिता की तबियत खराब रहने लगी। इसके चलते परिवार की देखभाल का जिम्मा उनके कंधे पर आ गया। शुरू से ही मेधावी छात्र रहने के चलते इलाहाबाद में मुंसिफ मजिस्ट्रेट की तैयारी के साथ-साथ अपना खर्च निकालने के लिए वे वहां कोचिंग पढ़ाने का काम करते थे। वर्ष 2010 में पिता की मौत के बाद पारिवारिक स्थिति और खराब हो गई। इससे उन्हें तैयारी छोड़कर घर आना पड़ा।

इसके बाद घर पर रहकर सब्जी की खेती करना शुरू की। हालांकि, इसमें वह पूरी तरह असफल रहे। इसी बीच बाराबंकी के एक किसान की केले की खेती से अधिक मुनाफा के बारे में जानकारी मिली। वे उनसे मिलने बाराबंकी गए। किसान ने उन्हें एक हजार पेड़ लगाने के लिए दिए। उन्होंने उसे पूरे तौर तरीके से लगाया और देखभाल करते हुए मुनाफा तय किया। इसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक वह अलग-अलग फसलों के पांच पुरस्कार जीत चुके हैं। वर्ष 2011 में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. कर्णसिंह चौहान द्वारा केले के अच्छे उत्पादन के लिए चौधरी चरण सिंह पुरस्कार मिला। इसके बाद उन्हें दूसरा पुरस्कार गेंदा के फूल व तीसरा पपीता के अच्छे उत्पादन के लिए मिला। चौथा व पांचवां पुरस्कार कुमारगंज विश्वविद्यालय द्वारा लौकी व शिमला मिर्च के लिए प्रगतिशील किसान के रूप में दिया गया। मौजूदा समय में उनके पास पांच हेक्टेयर में केला, आधा एकड़ में बेर, आधा एकड़ में अमरूद व एक बीघा में बंदा गोभी मौजूद है।
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प्रगतिशील किसान देवनरायण ने बताया कि पिता की मौत के बाद आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई थी। पिता द्वारा माता के नाम कुछ पैसा फिक्स जमा किया गया था। उन्हें इसे तुड़ाना पड़ा। करीब 73 हजार की इस धनराशि से उन्होंने सब्जी व केले की खेती की शुरुआत की थी। मेहनत के बल पर उन्होंने अपने सपने का साकार किया। केले के रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन के चलते अब समूचे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की अपेक्षा काफी बेहतर है।
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