अंबेडकरनगर। शादी का झांसा देकर महिला से दुष्कर्म और अश्लील वीडियो बनाने के आरोप में अधिवक्ता अशोक कुमार त्रिपाठी की जमानत अर्जी खारिज हो गई है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट चिंता राम ने उपलब्ध अभिलेख और पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपों को प्रथमदृष्टया गंभीर माना।
पीड़िता ने 26 जुलाई 20206 को पुलिस को शिकायती पत्र दिया था। उसने बताया कि वह अनुसूचित जाति की महिला है और करीब तीन साल से आरोपी अधिवक्ता के यहां मुंशी थी। आरोपी ने पति से विवाद और अलगाव की स्थिति का फायदा उठाकर शादी का भरोसा दिया। इसके बाद निबियहवा पोखरा स्थित किराये के कमरे में ले जाकर जबरन शारीरिक संबंध बनाए और अश्लील वीडियो तैयार किए। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ बार-बार संबंध बनाए गए। उसे कचहरी में काम से हटाने और फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी भी दी गई। तीन जनवरी 2026 को तबीयत खराब होने पर भी कचहरी बुलाया गया और दोबारा किराये के कमरे पर चलने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर पीटा गया, गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई।
पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए शिकायत को रंजिश का परिणाम बताया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि महिला के खिलाफ पहले से आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और रुपये की मांग पूरी न होने पर उसे फंसाया गया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से आरोपी के खिलाफ प्रथमदृष्टया गंभीर आरोप परिलक्षित होते हैं। अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत का पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर अर्जी निरस्त कर दी गई।