अंबेडकरनगर में गुरुवार दोपहर पहले तक कुछ इस तरह आसमान में छाए रहे बादल।
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गलनभरी ठंड से न लड़ पाई हल्की धूप
- दोपहर तक आसमान में घिरे रहे बादल, कुछ देर के लिए ही दिखे सूर्यदेव
फोटो 15 व 16
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबेडकरनगर। शुक्रवार को दोपहर में कुछ देर के लिए निकली धूप के बाद भी गलनभरी ठंड से लोगों को राहत नहीं मिली। इससे पहले भी दोपहर तक घने बादल छाए रहने से लोग ठिठुरते रहे। ठंड से बचाव के लिए लोग जगह-जगह अलाव का सहारा लेते दिखे। ज्यादातर लोग भी दोपहर तक घरों में ही दुबके रहे। इससे बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। दोपहर बाद जब धूप निकली तो चहल-पहल थोड़ी बढ़ी। शाम होते-होते एक बार फिर मौसम खराब हुआ तो लोग घरों को लौट गए।
शुक्रवार सुबह जब लोग उठे तो आसमान में घने काले बादल छाए थे। सर्द हवा भी चल रही थीं। इससे गलनभरी कड़ाके की ठंड से लोग ठिठुर उठे। सरकारी व निजी कार्यालयों में भी कर्मचारी विलंब से पहुंचे। खराब मौसम के चलते ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने भी बाजारों का रुख नहीं किया। नतीजा यह रहा कि जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र क बाजारों ेमें सन्नाटा पसर गया। जहां-तहां लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लेते दिखे। बाजारों में भी दुकानदार जगह-जगह दुकानों के सामने अलाव जलाकर तापते नजर आए। इस बीच दोपहर बाद धूप निकली, लेकिन तेजी अधिक न होने के चलते लोगों को खास राहत नहीं मिली। हालांकि, बाजारों में चहल-पहल कुछ बढ़ गई। शाम होते-होते फिर मौसम खराब हो गया। इसके चलते बाजारों में सन्नाटा छाने लगा। दुकानदार भी समय से पहले दुकानें बंदकर चले गए।
गर्म कपड़ों की लगातार बढ़ रही बिक्री
ठंड का दौर जारी रहने से लोग गर्म कपड़ों की बढ़-चढ़कर खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि बीते कई वर्षों के बाद इस तरह की बिक्री हुई है। शहजादपुर के गर्म कपड़ा व्यवसाई गिरिजाशंकर ने कहा कि आमतौर पर दिसंबर के अंत तक ही गर्म कपड़ों की बिक्री होती थी। विगत वर्ष तो गर्म कपड़ों की जो खेप आई थी, उसमें काफी कपड़े बचे रह गए थे। इस बार न सिर्फ बीते वर्ष के बचे कपड़े बल्कि इस बार भी कई खेप में आए कपड़ों की पूरी बिक्री हो गई। मांग को देखते हुए और खेप मंगाई गई है। गर्म कपड़ों के दुकानदार इम्तियाज हुसैन ने कहा कि बीते कई वर्षों के बाद इस तरह की ठंड पड़ी है। बताया कि अब तक तीन खेप गर्म कपड़ों की मंगा चुके हैं। यदि इसी प्रकार से ठंड का प्रकोप आगे भी जारी रहा तो और खेप मंगानी पड़ेगी।