बैरंग लौट रहे मरीज और तीमारदारों ने जताई नाराजगी
होमियोपैथिक की दवाओं के अर्क तो है लेकिन गोली नहीं
संवाद न्यूज एजेंसीअंबेडकरनगर। जिला अस्पताल परिसर स्थित आयुष विंग में मरीजों को परामर्श तो मिल रहा है लेकिन दवाएं नहीं। यहां न तो आयुर्वेद और न ही यूनानी दवाएं हैं। ये हालात एक साल से बने हुए हैं। और तो और होमियोपैथिक की दवाओं के अर्क तो हैं लेकिन गोली नहीं। इससे मरीजों को तगड़ा झटका लग रहा है। शनिवार को यहां पहुंचे मरीजों ने नाराजगी जताई और कहा कि प्रशासन को इस बारे में तुरंत प्रभावी इंतजाम करना चाहिए।
होम्योपैथिक, अयुर्वेदिक व यूनानी पद्धति में मरीजों के बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान करने के लिए जिला अस्पताल में आयुष विंग की स्थापना लगभग एक दशक पहले हुई थी। तब इससे मरीजों को बड़ी राहत मिली। समय बीतने के साथ ही मरीजों की उम्मीदों पर पानी फिरता गया।
दरअसल लगभग एक वर्ष से आयुर्वेद व यूनानी की दवाएं आयुष विंग में उपलब्ध नहीं हैं। होमियोपैथिक की ज्यादातर दवाओं का अर्क तो है लेकिन गोलियां नहीं हैं। इससे इस पैथ की दवाएं भी मरीजों को नहीं मिल रही हैं। नतीजा यह है कि आयुर्वेद के डॉ. चंद्रेश, यूनानी के डॉ. एम बेग व होमियोपैथिक के डॉ. प्रदीप गुप्ता आने वाले मरीजों को सिर्फ परामर्श देते हैं। मरीजों को दवाएं बाहर से लेनी पड़ती हैं। इससे उन्हें आर्थिक चपत लगती है।
दवाएं न होने का असर मरीजों की ओपीडी पर भी पड़ रहा है। प्रतिदिन डेढ़ सौ से अधिक मरीज यहां पहुंचते हैं। लेकिन दवा न होने के चलते चिकित्सक से परामर्श भी नहीं लेते। जिन मरीजों को एलोपैथिक दवाएं नहीं लेनी होती सिर्फ वह मरीज ही परामर्श लेते हैं। ऐसे मरीजों की संख्या भी कम हो रही है।
उपलब्ध कराई जाएं दवाएं
जहांगीरगंज निवासी बृजेश कुमार शनिवार को आयुष विंग में भटकते मिले। कहा कि उन्हें पेट की बीमारी है। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. चंद्रेश से इलाज कराया लेकिन दवा न होने पर अब बाहर से खरीदना पड़ रहा है। महरुआ निवासी शकुंतला ने कहा कि उन्हें सांस की समस्या है। यूनानी पैथ में उनका इलाज चल रहा है। कहा कि चौथी बार इलाज के लिए आई हैं। डॉ. एम बेग ने इलाज तो किया लेकिन दवा अस्पताल से नहीं मिल सकी। ऐसे में अब इसे बाहर से लेना पड़ रहा है। कहा कि दवाएं काफी महंगी होती हैं। ऐसे में बड़ी आर्थिक चपत लगती है।
परामर्श तक सीमित है विंग
दवाओं की अनुपलब्धता के चलते सामान्य मरीज कम हुए तो आयुष विंग में तैनात चिकित्सक एंटी रैबीज इंजेक्शन की जरूरत वाले मरीजों को देखने लगे। यहां मौजूद चिकित्सक उन्हें देखने के बाद घाव को देखते हुए डोज लगने के बारे में लिखते हैं। इसके बाद ही संबंधित व्यक्ति को जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन लग पाता है
नहीं है आरएल व डीएनएस
अरबन अस्पताल मोहसिनपुर मंसूरपुर में डॉयरिया से संबंधित आरएल व डीएनएस दवाएं नहीं हैं। डायरिया पीड़ित मरीज को इन दोनों दवाओं की बोतल चढ़ाई जाती है। लगभग एक पखवारे से नदारद संबंधित दवाओं के बोतल न होने से डायरिया से पीड़ित मरीज को भर्ती नहीं किया जा रहा है। यदि सामान्य दवाओं से मरीज की तबियत में सुधार नहीं होता तो उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, या फिर मरीज को संबंधित दवाओं की बोतल बाहर से मंगानी पड़ती है। प्रभारी डॉ. अमित कुमार ने बताया कि संबंधित दवाओं की बोतल की उपलब्धता के लिए सीएमओ कार्यालय को पत्र भेजा गया है।
निदेशालय को भेजा गया पत्र
आयुष विंग में आयुर्वेद व यूनानी की दवाएं नहीं हैं। इसके अलावा होमियोपैथिक में दवाओं का अर्क है लेकिन गोली नहीं है। इनकी उपलब्धता के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेजा गया है। -डॉ. ओमप्रकाश सीएमएस