टांडा ब्लॉक में दहियावर ग्रामसभा के मेड़री गांव का प्राचीन मठिया माता मंदिर।
अंबेडकरनगर। टांडा ब्लॉक में दहियावर ग्रामसभा के मेड़री गांव के प्राचीन मठिया माता मंदिर भले ही आसपास के जिलों के लोगों की आस्था का केंद्र हो, लेकिन प्रशासनिक फाइलों में यह दूर-दूर तक नजर नहीं आता है। इसी कारण यह मंदिर विकसित नहीं हो सका। पर्यटन विभाग की ओर से भी इसको विकसित करने की कोई पहल नहीं की गई, जबकि यहां पर सोमवार व शुक्रवार को विशेष पूजा-अर्चना होती है। नवरात्र भर यहां आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। प्राचीन मठिया माता मंदिर को सिद्धपीठ के नाम से भी जाना जाता है।
यह मंदिर कितना पुराना है, इसकी सटीक जानकारी किसी के पास नहीं है। हां, इतना जरूर है कि ग्रामीणों की मदद से 1977 में इसका जीर्णोद्धार कराया गया। लगभग डेढ़ एकड़ में फैले इस मंदिर के बगल ही बना जलाशय खूबसूरती को चार चांद लगा रहा है। यहां के लोगों का मानना है कि इस गांव में कोई चोरी करके नहीं जा सकता। सोमवार व शुक्रवार को यहां पर जिलेभर से श्रद्धालु पूजन-अर्चन करने आते हैं। नवरात्र पर यहां पूरे नौ दिन अनुष्ठान चलता है। आसपास के जिलों से श्रद्धालु माथा टेकने व मन्नत मांगने आते हैं। इसके अलावा शादी करने के बाद नव दंपती पहले यहां माथा टेकते हैं, फिर अपने घर जाते हैं।
दहियावर गांव के राधेश्याम ने बताया कि बहुत पहले एक राजा अपने राजमहल में बने मंदिर के लिए मां की प्रतिमा को लाने गए थे। इसी रास्ते से वापस आते समय यहीं पर डोली में रखी मूर्ति को रख कर विश्राम करने लगे। सुबह मूर्ति को उठाते समय वह टस से मस नहीं हुई तो थक-हार कर राजा मूर्ति को वहीं छोड़कर चले गए। कुछ दिन बाद यहां गांव के लोगों ने मूर्ति देखी तो उसी स्थल पर छोटा मंदिर बनाकर पूजा पाठ करने लगे। लोगों की मन्नतें पूरी होने लगी तो यहां की प्रसिद्धि बढ़ती गई।
बगल के गांव दरवेशपुर के अच्छेलाल वर्मा ने बताया कि इतना प्राचीन मंदिर होने के बाद इसकी सुधि नहीं ली जा रही है। पर्यटन के क्षेत्र में विकसित हो जाए तो क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ेेगा और यहां का विकास हो जाएगा। मेड़री गांव के वासुदेव ने बताया कि सच्चे मन से यहां पर मानी गई मनौती पूरी होती है। मनौती पूरी हाेने पर यहां लोग प्रसाद चढ़ाने आते हैं। माता रानी की कृपा से इस गांव में चोरी नहीं होती है। पुजारी श्यामलाल दास कहते हैं कि माता रानी के इस दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाता है। सोमवार व शुक्रवार के अलावा नवरात्र में यहां पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि यहां पर सरकार की नजर पड़ जाए तो यह मंदिर ओर बेहतर बन जाए।