अजईपुर के राममिलन ने ग्राम पंचायत की जमीन पर छप्पर डालकर कब्जा किया था, जिसे हटाने के लिए एसडीएम कोर्ट से दो बार आदेश भी हो चुका था। कब्जा न हटने पर 21 मार्च को एसडीएम पवन जायसवाल दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। कार्रवाई के बीच राममिलन के पुत्र अखिलेश ने नशे में खुद ही छप्पर में आग लगा दी।
घटनास्थल से चंद कदम की दूरी पर एक छप्पर में राममिलन की पोती अनन्या की किताबें व स्कूल बैग रखा था। अनन्या छप्पर के नीचे से बैग निकालकर चीखती हुई भागी थी। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। सपा नेता सिद्धार्थ मिश्रा ने गत मंगलवार को अनन्या व उसके परिवार से मुलाकात कर परास्नातक की पढ़ाई और शादी का जिम्मा उठाने के साथ 11 हजार रुपये का चेक भी प्रदान किया। इससे पहले सपा नेता पूर्व जिलाध्यक्ष रामशकल यादव ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई सीबीएसई बोर्ड से कराने का जिम्मा लिया।
नवीन परती की जमीन पर किया था कब्जा
कुछ ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि गाटा संख्या 888 क्षेत्रफल 0.060 हेक्टेयर पर बरम बाबा स्थान है। उसी जमीन पर राममिलन ने पशुबाड़ा के लिए छप्पर डालकर कब्जा कर लिचा है। इसपर 14 सितंबर 2024 को लेखपाल ने जांच की। जमीन नवीन परती में दर्ज मिली। इसके बाद तहसीलदार न्यायालय में वाद दायर हुआ। सुनवाई करते हुए तहसीलदार पदमेश श्रीवास्तव ने 10 अक्तूबर 2024 को बेदखली का आदेश पारित किया। इसपर राममिलन ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की। 28 जनवरी 2025 को सुनवाई की गई और 14 फरवरी को दोबारा बेदखली का आदेश जारी हुआ। इसके बाद भी कब्जा न हटने पर कार्रवाई की गई। इससे पूर्व वर्ष 2022 में इसी जमीन से रामकुमार, अंसरी अली व असगर अली का कब्जा हटवाया गया था।
मजदूरी पर निर्भर है परिवार
राममिलन के पास करीब आठ बिस्वा जमीन है। उसके पास एक पक्का मकान भी है। राममिलन खुद मजदूरी करते हैं। पत्नी शांति रसोइया हैं। पुत्र अखिलेश, उमेश, अभिषेक व सुरेश अलग-अलग शहरों में मजदूरी करते हैं।
शासन ने दोबारा मांगी रिपोर्ट
अनन्या प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट में चर्चा होने के बाद शासन ने एक बार फिर मामले की रिपोर्ट मांगी है। इसपर तहसील प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। बताया जा रहा है कि गांव में एक अन्य निजी जमीन पर कब्जे का मामला भी दीवानी न्यायालय में विचाराधीन है, जिसमें राममिलन और गांव के कुछ अन्य लोग ही वादी-प्रतिवादी हैं।