मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर अंकुश पाने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा छापेमारी महज औपचारिकता तक ही अभी सीमित है। इसी का नतीजा है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। इसके साथ ही मिठाई बनाने के अधिकांश स्थलों पर गंदगी का अंबार लगा है।
इससे विभिन्न प्रकार के संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बना रहता है। इसकी शिकायत लगातार संबंधित अधिकारियों से की जाती है, लेकिन ऐसे दुकानदारों के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती।
शुक्रवार 30 अक्तूबर को करवा चौथ पर्व के अलावा आगामी दिनों में दीप पर्व भी पड़ रहा है। इसे देखते हुए मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री तेज हो गई है। जैसे जैसे पर्व निकट आते जा रहे हैं मिलावट का खेल भी बढ़ता जा रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारी इस पर अंकुश पाने को लेकर पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं।
पर्व से पहले दो चार जगह छापे मारकर विभाग अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर लेता है। नतीजा यह है कि न सिर्फ खाद्य पदार्थों, बल्कि मिलावटी मिठाइयों व मावा की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। वैसे तो जिले में मावा मण्डी नहीं है, लेकिन कानपुर व बनारस से मावा की बड़ी खेप जिला मुख्यालय पर पहुंचती है।
इस प्रकार के मावा को जिला मुख्यालय पर लाने के लिए अधिकांशत: परिवहन निगम की बसों का प्रयोग दुकानदार करते हैं। मावा की बड़ी खेप आने के बाद भी खाद्य संरक्षण एवं औषधि प्रशासन की टीम अब तक बड़ा अभियान नहीं चला सका है।
जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों की छोटी बड़ी बाजारों में स्थित मिठाई की दुकानों पर मिलावटी मिठाइयों की बिक्री भी धड़ल्ले से की जा रही है। ऐसे दुकानदारों के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई किए जाने की सुध विभागीय अधिकारियों को नहीं है।
तमाम शिकायतों के बाद बीते दिनों खाद्य संरक्षण एवं औषधि प्रशासन की टीम ने छापेमारी अभियान चलाया था, लेकिन उसका अभियान महज छोटे दुकानदारों तक ही सीमित रहा। अब जबकि कई महत्वपूर्ण पर्व आगामी दिनों में पडने वाला है, लेकिन अब तक विभागीय अधिकारियों द्वारा छापेमारी अभियान नहीं शुरू किया जा सकता है।
बीते दिनों की अपेक्षा मौजूदा समय में करवा चौथ व दीप पर्व के मद्देनजर मावा व मिठाइयों के दाम में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मावा का व्यवसाय करने वाले अकबरपुर नगर के रामअवतार जायसवाल ने बताया कि बीते दिनों तक जो मावा 220 रुपये से 240 रुपये में बिकता था, वही मावा मौजूदा समय में 260 रुपये से 280 रुपये में बिक रहा है। सोनू गुप्ता ने बताया कि मिठाई के दाम में भी वृद्धि हुई है।
एक तरफ जहां मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री का प्रतिकूल प्रभाव उपभोक्ताओं की सेहत पर पड़ रहा है, वहीं जिन कारखानों पर मिठाई का निर्माण होता है, उसके इर्दगिर्द गंदगी का अंबार लगा होने से संक्रामक रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।