कटेहरी। क्षेत्र के चनहा पकड़ी में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को भागवत के प्रसंगों का वर्णन करते हुए धर्म, भक्ति और कर्तव्य के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रवाचक आचार्य पंकज शास्त्री ने बताया कि दृढ़ आस्था से असंभव भी संभव हो सकता है। जीवन में विनम्रता अपनाने से संबंध मजबूत होते हैं।
सही कर्म और शुद्ध विचार ही सच्ची सफलता की कुंजी हैं। विपरीत परिस्थितियों में शांत रहना ही बुद्धिमानी है।भागवत महात्म्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ग्रंथ जीवन के प्रत्येक पक्ष को दिशा देने वाला है। उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति, भगवान की महिमा और भक्ति के मार्ग को सरल भाषा में समझाया। भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शक है। मनुष्य को अपने कर्म, व्यवहार और विचारों को शुद्ध रखना चाहिए। लोभ, क्रोध और अहंकार से दूर रहकर ही समाज में समरसता कायम रह सकती है। आचार्य पंकज शास्त्री ने युवाओं को संस्कार और अनुशासन अपनाने का आह्वान किया। परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। जीवन में कठिनाइयां आती हैं, लेकिन धैर्य और सकारात्मक सोच से हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।