अंबेडकरनगर। मुंबई और दिल्ली जैसे महानगर तक में पानी भरा है, हम यहां क्या कर सकते हैं। ये बहाना बता कर अकबरपुर नगर पालिका परिषद के अधिकारियों व कर्मचारियों ने जनता की परेशानियों से मुंह मोड़ लिया। जगह-जगह हुए जलभराव के बीच बुधवार देर शाम से लेकर गुरुवार पूर्वाह्न तक इसी तरह का रवैया अकबरपुर नगर पालिका परिषद प्रशासन ने बना रखा था।
हालांकि कई नागरिकों ने अधिकारियों से पूछ भी लिया कि मुंबई में तो बीएमसी के कर्मचारी बरसात के दौरान सड़कों पर दिखते हैं, लेकिन यहां तो आप लोग अपने-अपने घरों में दुबके बैठे हैं। तीखे सवाल से परेशान नगर परिषद के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचने का झूठा आश्वासन देकर अपनी बला टाली।
जिले में हुई अतिवृष्टि के बीच अकबरपुर नगर पालिका परिषद प्रशासन का बेहद गैर जिम्मेदाराना रवैया सामने आया। दरअसल बुधवार हुई मूसलाधार बारिश से शहर में जगह-जगह जलभराव हो गया। लोग बताते हैं पिछले एक दशक में पहली बार ऐसा जलभराव देखा। एक तरफ जहां मुख्य मार्गों पर घुटने-घुटने तक पानी भरा था, वहीं गली मोहल्लों में भी हालत बद से बदतर हो गए थे।
समूचे अकबरपुर नगर में 500 से ज्यादा घरों में पानी घुस गया था। शाम होते-होते स्थिति और विकट हो गई। नगर के एक दर्जन नए व पुराने मोहल्लों को मिलाकर 40 से अधिक ऐसे मार्ग थे, जिनसे होकर घरों तक पहुंचना लोगों के लिए आसान नहीं था। ऐेसे में लोगों के सामने नगर परिषद प्रशासन से सहायता लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। इतनी खराब स्थिति होने के बाद भी अधिकारी बेहद असंवेदनशील नजर आए और हालात का जायजा लेने घरों से बाहर नहीं निकले। लोगों ने मदद के लिए फोन किया तो तर्क दिया कि मुंबई व दिल्ली तक पानी से जाम है, हम लोग ही यहां क्या करें।
हालांकि नागरिकों ने इस पर अधिशाषी अधिकारी से लेकर नगर परिषद के वरिष्ठ कर्मचारियों को खूब खरी खोटी सुनाई। कई नागरिकों ने आक्रोश उतारते हुए दूरभाष पर ही जवाब दिया कि आप लोग तो पानी से डरकर घरों में छिपे हुए हो और अपनी नाकामी छिपाने के लिए मुंबई व दिल्ली का कुतर्क दे रहे हो। मुंबई में तो बाढ़ के दौरान बीएमसी कर्मचारी तब भी सड़कों पर मौजूद रहते हैं जब बरसात हो रही होती है। नागरिक संजीव ने कहा कि इस तरह के जवाब की उम्मीद उन्हें नहीं थी।
इस कारण उन्होंने मौके पर पहुंचने का झूठा भरोसा देकर अपना पल्ला छुड़ा लिया। एक अन्य नागरिक पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि वे जब बारिश के दौरान ही नगर परिषद कार्यालय पहुंचे तो वहां न तो अधिशाषी अधिकारी थे और न ही अभियंता या अन्य कोई वरिष्ठ कर्मी। नाम न छापने की शर्त पर लोगों ने बताया कि यह सभी लोग अपने घरों पर मौजूद हैं।
अकबरपुर नगर पालिका परिषद के इस रवैये पर नागरिकों ने कड़ी नाराजगी भी जताई। नागरिकों में सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर थी कि अधिशाषी अधिकारी से लेकर तमाम अभियंता व कर्मचारी नगर में हालात का जायजा लेने के लिए निकलने के बजाए घरों में बैठे रहे और मुंबई व दिल्ली के भी पानी से जाम होने का कुतर्क देते रहे। जियाउर्रहमान ने कहा कि नगर परिषद के इस तर्क से तो तर्क भी शर्मिंदा है। मिसबाहुद्दीन अंसारी ने कहा कि फर्जी बहाना नहीं काम चाहिए।
मृत्युंजय कुमार ने कहा कि सब जिम्मेदार फोन बंद कर बारिश का मजा ले रहे। आलोक रंजन त्रिपाठी ने कहा कि उनकी गली में इतना ज्यादा पानी था कि नगर परिषद के न सुनने पर उन लोगों ने खुद ही उसे साफ करने का काम किया। नीरज त्रिपाठी का कहना था कि नगर परिषद के अधिशाषी अधिकारी को कहीं जाने की सुध ही नहीं। गौरव श्रीवास्तव ने लिखा कि सभासदों को महत्व न देने से यह हाल है। लालजी चतुर्वेदी का कहना था कि उनके घर के बगल की सड़क ही बह गई, लेकिन नगर परिषद का पता नहीं।
नागरिक हितों का ध्यान रखा जा रहा है। जलनिकासी की बेहतरी के लिए ही बीते दिनों विभिन्न मोहल्लों में नालियों का निर्माण कराया गया। आगे भी निर्माण प्रस्तावित हैं। यह तय किया जाएगा कि जलभराव आदि स्थिति में अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचकर जायजा जरूर लें और जरूरत के मुताबिक कार्रवाई करें।
- सरिता गुप्ता, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद अकबरपुर