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Ambedkar Nagar News: 25 लाख की आईटीसी चोरी का आरोपी दिल्ली से गिरफ्तार

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अंबेडकरनगर। फर्जी फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दुरुपयोग कर सरकारी राजस्व को चूना लगाने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में दिल्ली की फर्म पूजा अर्थ मूवर्स के प्रोपराइटर विनोद कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कूटरचित बिलों के आधार पर लगभग 25 लाख रुपये के सरकारी राजस्व का गबन किया है।
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इस मामले में मुख्य आरोपी निजामुद्दीन अंसारी के अलावा जिले के कई अन्य बड़े व्यापारी और चार्टर्ड अकाउंटेंट भी पुलिस के रडार पर हैं। राज्य कर अधिकारी खंड प्रथम विनोद कुमार ने 16 दिसंबर 2025 को अकबरपुर कोतवाली में मेसर्स अंसारी ट्रेडर्स, शहजादपुर के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि फर्म ने 18 अन्य फर्मों से बिना वास्तविक खरीद के ही कागजों में 4.24 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ।
विवेचना के दौरान दिल्ली निवासी विनोद कुमार का नाम प्रकाश में आया। विवेचक कृष्णबली सिंह ने जब मामले की गहनता से जांच की तो पता चला कि आरोपी विनोद कुमार ने अपनी फर्म पूजा अर्थ मूवर्स, हिंदुस्तान इंफ्रा, घई इंटरप्राइजेज सहित चार फर्मों के नाम पर 26 लाख रुपये से अधिक की फर्जी खरीदारी दिखाई। इसके बाद, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के रूप में वापस मिले लगभग 25 लाख रुपये को उसने अपने व्यक्तिगत प्रयोग में खर्च कर सरकारी राजस्व का चूना लगाया। इसी आधार पर पुलिस ने दिल्ली से आरोपी को गिरफ्तार किया और बुधवार को जेल भेज दिया। इंस्पेक्टर श्रीनिवास पांडेय ने बताया कि अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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यह था पूरा मामला
राज्य कर अधिकारी खंड प्रथम विनोद कुमार के अनुसार अकबरपुर के मेसर्स अंसारी ट्रेडर्स, जानकी मंदिर शहजादपुर में निजामुद्दीन अंसारी के नाम से फर्म संचालित है। इस फर्म ने नोएडा की डोलका रिटेलर्स प्राइवेट लिमिटेड से बिना वास्तविक खरीद-बिक्री के जुलाई 2025 में 2 करोड़ 49 लाख 9180 रुपये की बिक्री दिखाई, जिसके आधार पर 1 करोड़ 18 लाख 66 हजार 926 रुपये की आईटीसी ली गई। इसके बाद, अगस्त माह में 3 करोड़ 34 लाख 97 हजार 789 रुपये की बिक्री दिखाकर 30 लाख 14 हजार 801 रुपये की जीएसटी की बोगस आईटीसी हस्तांतरित की गई। जांच में यह भी पाया गया कि पंजीयन प्रार्थनापत्र में लगाया गया किरायानामा भी कूटरचित था और फर्म के बताए पते पर उसका संचालन नहीं हो रहा था। इन अनियमितताओं के चलते 30 सितंबर 2025 को फर्म का पंजीयन निलंबित कर दिया गया था जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
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