अंबेडकरनगर। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. धर्मेंद्र कुमार यादव की अदालत ने आलापुर के 24 साल पुराने मारपीट के मामले में इंदईपुर निवासी शिवमूरत जायसवाल को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने अभियोजन के गवाहों के बयानों में घटना के समय, स्थान, हथियार और मारपीट की अवधि को लेकर विरोधाभास पाया।
अभियोजन के अनुसार, 16 सितंबर 2002 को इंदईपुर में साझा दीवार को लेकर जयराम गुप्त और शिवमूरत के बीच विवाद हुआ था। आरोप था कि दीवार गिराकर जमीन पर कब्जे का विरोध करने पर शिवमूरत ने जयराम पर धारदार लोहे की सरिया/सब्बल से हमला किया। साथ ही गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था। मामले में एनसीआर दर्ज होने के बाद न्यायालय के आदेश पर विवेचना की गई और आरोपपत्र दाखिल किया गया।
विचारण के दौरान जयराम गुप्त, वसी अख्तर, चंद्र गुप्त और चिकित्सक डॉ. आरपी पाल की गवाही हुई। अदालत ने पाया कि जयराम ने घटना का समय अलग-अलग बयानों में कभी नौ बजे, कभी पौने नौ बजे और कभी आठ बजे बताया। हथियार के संबंध में भी बयान में लोहे की छड़ और सब्बल का अलग-अलग उल्लेख किया गया। वसी अख्तर ने मारपीट करीब पांच से सात मिनट तक चलने की बात कही, जबकि जयराम ने इसकी अवधि एक मिनट से भी कम बताई। चंद्र गुप्त के बयान में जयराम के नींव में गिरने की बात सामने आई।
थाने जाने के संबंध में भी गवाहों के बयान अलग-अलग पाए गए। चिकित्सीय साक्ष्य से यह निश्चित नहीं हो सका कि चोटें आरोपी द्वारा ही पहुंचाई गई थीं। अदालत ने अभियोजन को आरोप युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में असफल माना। इसके बाद शिवमूरत जायसवाल को दोषमुक्त कर दिया।