टांडा के मीरानपुरा स्थित उदासीन आश्रम हनुमान मंदिर में मंगलवार को दो दिवसीय गुरुपर्व महोत्सव के
विद्युतनगर। गुरु-शिष्य परंपरा की स्मृतियों को संजोए टांडा के प्राचीन उदासीन आश्रमों में दो दिवसीय गुरुपर्व महोत्सव मंगलवार को संपन्न हुआ। इसमें संतों और महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। मीरानपुरा स्थित उदासीन आश्रम हनुमान मंदिर और छज्जापुर के बड़ा फाटक स्थित उदासीन आश्रम में सोमवार और मंगलवार को धार्मिक कार्यक्रम हुए।
इसमें टांडा के अलावा विभिन्न शहरों से पहुंचे शिष्यों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। दोनों आश्रमों में धर्म ध्वजा का विधि-विधान से पूजन कर समाधिस्थ संतों और महापुरुषों को श्रद्धांजलि दी गई। सोमवार को संत समागम, भजन-कीर्तन और प्रवचन हुए। संतों ने गुरु परंपरा, आध्यात्मिक जीवन और गुरु-शिष्य संबंध के महत्व पर विचार रखे। इसके बाद भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
उदासीन संत परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध को विशेष महत्व दिया जाता है। टांडा के दोनों आश्रमों में पितृपक्ष के दौरान हर वर्ष गुरु स्मृति में गुरु पर्व महोत्सव आयोजित किया जाता है। इसमें देश के अलग-अलग शहरों से अनुयायी और श्रद्धालु पहुंचते हैं। मीरानपुरा स्थित उदासीन आश्रम हनुमान मंदिर के महंत दीनदयाल दास ने बताया कि गुरुपर्व पर गुरुओं और महापुरुषों की पूजा-अर्चना के साथ धर्म ध्वजा का पूजन किया गया। अनुयायियों और श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की। बड़ा फाटक छज्जापुर स्थित उदासीन आश्रम के महंत डॉ. चंद्र प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि उदासीन परंपरा की स्थापना जगद्गुरु श्रीचंद्र ने की थी।
वे गुरु नानक देव के पुत्र और तपस्वी संत थे। गुरुपर्व के दौरान श्रद्धालुओं ने उनकी परंपरा और शिक्षाओं को याद किया। मंगलवार को संतों की विदाई के बाद दोनों आश्रमों में आयोजित दो दिवसीय गुरुपर्व महोत्सव का समापन हुआ।
टांडा के मीरानपुरा स्थित उदासीन आश्रम हनुमान मंदिर में मंगलवार को दो दिवसीय गुरुपर्व महोत्सव के