अंबेडकरनगर। बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई करोड़ों रुपये की रिवैंप योजना अपने लक्ष्यों को पूरा करने में विफल साबित हो रही है। योजना के तहत शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली के तारों और खंभों को बदलने का काम तो किया गया है, लेकिन इसके बावजूद सड़कों के ऊपर से गुजर रहे हाई-वोल्टेज तार सुरक्षा जालियों के बिना हादसों को निमंत्रण दे रहे हैं। खासकर अकबरपुर-टांडा मार्ग और बसखारी मार्ग पर स्थिति चिंताजनक है, जहां मौत के तार एक छोर से दूसरे छोर तक दौड़ रहे हैं।
रविवार को की गई पड़ताल में अकबरपुर शहर में तारों का मकड़जाल इस कदर देखने को मिला कि तार टूटने से किसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है। अकबरपुर टांडा मार्ग के पटेलनगर तिराहे पर 11 हजार और 33 हजार की बिजली लाइनें एक-दूसरे को क्रॉस कर रही हैं, लेकिन इनके नीचे सुरक्षा जाली नहीं लगाई गई है। इस मार्ग से हर दिन हजारों की संख्या में राहगीरों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में यदि तार टूटकर नीचे गिरता है तो हादसा होना तय है। कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के पास भी सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक गुजारे गए खुले बिजली के तार हादसे को दावत दे रहे हैं। इसी तरह राजकीय हवाई पट्टी के निकट भी यही मंजर है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति कमोबेश यही है। रिवैंप योजना के तहत शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में तारों से लेकर खंभे बदलने का काम कराया गया है और शहर में शत-प्रतिशत काम पूरा होने का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन काम अभी भी मंद गति से चल रहा है। इस संबंध में अधीक्षण अभियंता रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि ऐसे तारों को चिन्हित कर जल्द ही उनके नीचे सुरक्षा जाली लगवाई जाएगी। हालांकि, योजना के क्रियान्वयन में देरी और सुरक्षा उपायों की अनदेखी आमजन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।