अंबेडकरनगर। किछौछा स्थित दरगाह परिसर में चालीसवें मुहर्रम पर मंगलवार को अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह हजरत सैयद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी के आस्ताने से परंपरागत रस्मों के साथ ताजिया निकाला गया, जो मलंग गेट और सलामी गेट से होते हुए कर्बला मैदान स्थित इमाम चौक पहुंचा। यहां जायरीनों ने फूल, इत्र और फातिहा पेश कर दुआ मांगी।
शाम को बसखारी से अलम का जुलूस भी कर्बला मैदान पहुंचा। आस्ताना महबूब-उल-मशायख के सज्जादानशीन सैयद शाह नुरुद्दीन अशरफ ने ताजिया पर फूल पेश कर दुआ की। अंतिम जियारत के बाद ताजिया को नीर तट पर सुपुर्द-ए-खाक किया गया। पूरे आयोजन के दौरान पुलिस सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।
चेहल्लुम पर मंगलवार को नगर और आसपास के क्षेत्रों में अकीदत के साथ धार्मिक कार्यक्रम हुए। जाफराबाद के छोटे-बड़े इमामबाड़ों से उस्मानपुर, बादीपुर, नीमतल और चिलवनिया कर्बला तक नौहा, मर्सिया और मातम के बीच जुलूस निकाले गए। अकीदतमंदों ने कर्बला के 72 शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
छोटे इमामबाड़े में अंजुमन जाफरिया के तत्वावधान में मर्सिया ख्वानी हुई। एएमयू के प्रोफेसर मौलाना असगर एजाज कायमी ने कर्बला के बाद हुसैनी कुनबे की कुर्बानियों पर प्रकाश डाला। गहवारा-ए-अली असगर, दुलदुल और अलम की जियारत के बाद विभिन्न अंजुमनों ने नौहा और मातम पेश किया। जुलूस जिंदान-ए-शाम की प्रस्तुति के बाद छोटे इमामबाड़े पहुंचकर संपन्न हुआ। सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पूरे समय तैनात रहे।
ताजिया निकालते लोग
ताजिया निकालते लोग