अंबेडकरनगर। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित की जा रही अतिमहत्वाकांक्षी कृषक दुर्घटना बीमा योजना का समुचित लाभ पात्रों को नहीं मिल पा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में योजना का लाभ पाने के लिए 164 दावे किए गए। 83 दावों के लिए आवश्यक चार करोड़ 15 लाख रुपये अब तक उपलब्ध नहीं कराए जा सके। नतीजतन योजना का लाभ पाने के लिए संबंधित परिवारीजन कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें बीमा की धनराशि कब मिलेगी, इसका जवाब कोई भी देने को तैयार नहीं है।
किसान की दुर्घटना में मौत के बाद उनके परिवारीजनों को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए वर्ष 2004 में तत्कालीन सपा सरकार ने कृषक दुर्घटना बीमा योजना चलाने की घोषणा की थी। योजना के तहत आकस्मिक निधन के बाद परिवारीजनों को एक लाख रुपये का बीमा किए जाने का प्राविधान था। इस बीच वर्ष 2012 में पुन: सपा सरकार बनने पर योजना के तहत धनराशि बढ़ाकर पाच लाख कर दी गई। इसके साथ ही अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति का कोटा अलग कर दिया गया। इसके तहत चालू वित्तीय वर्ष योजना का लाभ पाने के लिए कुल 26 दावे किए गए, इसके लिए शासन से एक करोड़ 30 लाख रुपये विभाग को उपलब्ध भी करा दिया गया। इसके बाद सभी पात्रों को धन भी उपलब्ध करा दिया गया। सामान्य कोटे से कुल 138 दावे किए गए। इसके तहत शासन ने प्रथम किस्त के रूप में 18 दावों के लिए 90 लाख व द्वितीय किस्त के रूप में 37 दावों के लिए एक करोड़ 85 लाख रुपये उपलब्ध करा दिए हैं। शेष 83 दावों के लिए चार करोड़ 15 लाख रुपये अब तक विभाग को नहीं मिल सके हैं। नतीजा यह है कि योजना का लाभ पाने के लिए संबंधित किसानों के परिजन कार्यालय का चक्कर लगाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
अकबरपुर के रामअशीष व रामतीरथ ने बताया कि उन्होंने बीमा योजना का लाभ पाने के लिए आवश्यक कागजात लगभग दो माह पूर्व जमा कर दिए थे। उन्हें बताया गया कि शीघ्र ही धनराशि उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके बाद से वे लगातार कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक धनराशि नहीं उपलब्ध कराई जा सकी है। प्रत्येक बार यही बताया जाता है कि अभी तक शासन से ही धनराशि उपलब्ध नहीं हो सकी है।