अंबेडकरनगर। परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों को नए शिक्षासत्र में पुरानी किताबों के साथ ही स्कूल जाना पड़ेगा। कारण ये कि अब तक जिले में केवल 54 प्रतिशत पुस्तकें ही पहुंची हैं। जो पुस्तकें आई भी हैं, वह भाड़े का समुचित मूल्य निर्धारित न होने के कारण पुस्तकें स्कूलों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। शासन के निर्देशानुसार 20 जून तक सभी किताबों का जिले में व 25 जून तक स्कूलों में पहुंचने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अब तक किताबें जिले में नहीं पहुंच पाईं हैं।
सर्वशिक्षा अभियान के तहत परिषदीय स्कूलों में अध्यनरत विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराने की योजना जिले में गति नहीं पकड़ पा रही है। नए शिक्षासत्र में विद्यार्थियों के हाथों में नई पुस्तकें देने की योजना को लेकर शासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक जिले में मात्र 54 प्रतिशत ही पुस्तकें पहुंच सकी हैं, जबकि कुल 16 लाख 47 हजार 697 पुस्तकों की आवश्यकता है। इसमें प्राथमिक स्कूलों के छात्रों के लिए आठ लाख 35 हजार 406 व उच्च प्राथमिक स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए आठ लाख 12 हजार 391 पुस्तकें शामिल हैं। यह पुस्तकें आगरा व मथुरा के प्रिंटिंग प्रेस से भिजवाई जानी थी। प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा के निर्देशानुसार प्रिंटिंग प्रेसों को 20 तक सभी पुस्तकों को जिलों में पहुंचा देना था तथा 25 जून तक छात्रों की संख्या के आधार पर विद्यालयों में पहुंच जाना था। योजना को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, जो पुस्तकें जिले में पहुंच भी चुकी हैं, उन्हें स्कूलों तक नहीं भेजा जा सका है। इसके पीछे मुख्य कारण इन पुस्तकों का ढुलाई भाड़ा निर्धारित न होना बताया जाता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार शासन द्वारा जो भाड़ा निर्धारित किया गया है, वह बहुत कम है। इस भाड़े पर वाहन मालिक पुस्तकों की ढुलाई करने को तैयार नहीं हैं। भाड़े का समुचित निर्धारण न होने के कारण ही पुस्तकों को स्कूलों तक नहीं भेजा जा सका है। उधर बीएसए दलसिंगार यादव ने बताया कि मुख्य विकास अधिकारी के समक्ष भाड़े को लेकर विचार विमर्श किया गया है। शीघ्र ही भाड़े का निर्धारण कर पुस्तकों को विद्यालयों में भेज दिया जाएगा।