अंबेडकरनगर। मनरेगा के तहत अपने चहेतों को 100 दिन से अधिक का कार्य दिया जाना ग्राम पंचायत सचिव व रोजगार सेवकों पर भारी पड़ने वाला है। लगभग 150 ऐसे ग्राम पंचायत सचिव व रोजगार सेवकों को नोटिस जारी करने के निदेश िदए गए हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्रों में 647 परिवारों को 100 दिन से अधिक का कार्य दे दिया है। 2706 दिन के अधिक रोजगार के बदले दिए जाने वाले भुगतान की रिकवरी इन कर्मचारियों से होगी। इस निर्देश के बाद संबंधित सचिवों व रोजगार सेवकों में हड़कंप का माहौल है।
गरीबों को उनके ही गांव में 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजना मनरेगा जिले में संबंधित अधिकारियों व रोजगार सेवकों की लापरवाही की भेंट चढ़ती जा रही है। लापरवाही का आलम यह है कि किसी को 10 दिन का भी काम मुश्किल हो रहा है, तो किसी को 100 दिन से अधिक का कार्य दे दिया गया। इतना ही नहीं, जिन्हें योजना के तहत कार्य दिया भी गया, उन्हें भुगतान के लिए भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसे लेकर कई बार न सिर्फ स्थानीय अधिकारियों वरन शासनस्तर पर शिकायतें हुईं। इसे गंभीरता से लेते हुए मंडल आयुक्त फैजाबाद ने डीएम को निर्देश देते हुए कहा कि जिनके द्वारा 100 दिन से अधिक का कार्य दिया गया है, उनसे धनराशि की रिकवरी कराई जाए। इस पर डीएम कर्णसिंह चौहान ने मनरेगा उपायुक्त भूपेंद्र सिंह से एक सप्ताह में अधिक खर्च की गई धनराशि को ग्राम पंचायत के खातों में स्थानांतरित किए जाने व कार्य में लापरवाही बरतने वाले ग्राम पंचायत सचिव व रोजगार सेवकों को नोटिस भेजे जाने का निर्देश दिया।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार योजना के तहत जिले में दो लाख 15 हजार 988 जाबकार्डधारकों के सापेक्ष अब तक 66 हजार 888 परिवारों को रोजगार दिया गया। इनमें 647 परिवारों को 100 दिन से अधिक का रोजगार दे दिया गया। ऐसे अधिक कार्य दिवसों की संख्या 2706 है। इसमें अकबरपुर विकास खंड में 126 परिवारों को 622 दिन, बसखारी में 20 परिवारों को 89 दिन, भीटी में 40 परिवार को 178 दिन, भियांव में 92 परिवार को 339 दिन, जहांगीरगंज में 27 परिवार को 107 दिन, जलालपुर में 198 परिवार को 765 दिन, कटेहरी में 59 परिवार को 266 दिन, रामनगर में 21 परिवार को 66 दिन व टांडा में 47 परिवार को 275 दिन अधिक रोजगार दिया गया। सीडीओ एसएस शर्मा ने बताया कि योजना के तहत एक परिवार को एक वर्ष में 100 दिन का ही रोजगार दिया जाना है। ग्राम पंचायत सचिव व रोजगार सेवकों की मनमानी के चलते ही कुछ परिवारों को 100 दिन से अधिक का कार्य व भुगतान हो गया है।