अंबेडकरनगर। बाबूजी, यदि जीवित प्रमाण पत्र ब्लॉकों या फिर तहसीलों में जमा कराया जाए, तो उन्हें काफी हद तक सुविधा हो सकती है। बीमारी का आलम है। ठीक से चला भी नहीं जाता, ऐसे में इतनी दूर की यात्रा करने में विभिन्न प्रकार की मुश्किल हो रही है। आप लोग मीडिया से जुड़े हैं, आप ही हमारी आवाज को अधिकारियों तक पहुंचाएं। कुछ इसी प्रकार की समस्या से जूझते हुए पेंशन धारक शनिवार को कोषागार में नजर आए। मौजूदा समय में उनको जीवित प्रमाण पत्र देना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें कोषागार तक विभिन्न प्रकार के साधनों से आना पड़ रहा है। इसमें उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ रहीा है। जीवित प्रमाणपत्र जमा करने में उन्हें पसीने छूट रहे हैं।
बताते चलें कि जिले में कुल 8,125 पेंशनधारक हैं। इसमें केंद्र के 146, उत्तर प्रदेश राज्य के 7, 705, दूसरे राज्य के 260, दूसरे देश के तीन व 11 विधायक शामिल हैं। इन्हें प्रत्येक वर्ष नवंबर माह में जीवित प्रमाण पत्र कोषागार कार्यालय में जमा करना होता है। चालू वित्तीय वर्ष में भी एक नवंबर से 15 दिसंबर तक पेंशनधारकों को जीवित प्रमाण जमा देना है। इसके लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों से सुबह से ही पेंशनधारकों का जो आना प्रारंभ होता है, वह कार्यालय बंद होने तक जारी रहता है। हालांकि जीवित प्रमाण पत्र जमा करने वालों को विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या दूरदराज के क्षेत्र से आने वाले पेंशनधारकों को हो रही है। शनिवार को ’अमर उजाला की टीम ’ जब कोषागार कार्यालय पहुंची, तो वहां तमाम पेंशनधारक फॉर्म लिए भटकते नजर आए। आने वाले पेंशनधारकों में कुछ को चलने में समस्या हो रही थी, तो कोई बीमार था।