अंबेडकरनगर। गर्मी से पहले ही ट्रांसफाॅर्मर दगा देने लगे हैं। बीते एक माह में 90 ट्रांसफाॅर्मर फुंक चुके हैं। इसमें सबसे अधिक ट्रांसफाॅर्मर 16 से 20 केवीए के हैं। तेजी से फुंक रहे ट्रांसफाॅर्मरोंं की गुणवत्ता पर अधीक्षण अभियंता ने संदेह जाहिर कर इनकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी इसके लिए टीम नहीं बन पाई है।
जिले के 42 बिजली उपकेंद्रों पर चार लाख 25 हजार उपभोक्ताओं को छोटे बड़े 30 हजार से अधिक ट्रांसफाॅर्मरोंं से बिजली की आपूर्ति दी जा रही है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही ट्रांसफाॅर्मर के फुंकने का सिलसिला तेज हो गया है। जनवरी में 80 ट्रांसफाॅर्मर फुंके थे। फरवरी 22 तक विभिन्न क्षमता के 90 ट्रांसफाॅर्मर फुंक चुके हैं। इनमें आधे ट्रांसफाॅर्मर 16 और 20 केवीए क्षमता के हैं। पूर्व में ही इनकी मरम्मत का कार्य कराया गया था। अचानक तेजी से इन ट्रांसफाॅर्मर के फुंकने का सिलसिला बढ़ने पर बीते दिनों ट्रांसफाॅर्मर कार्यशाला के अवर अभियंता धमेंद्र कुमार को अधीक्षण अभियंता ने बुलाकर ट्रांसफाॅर्मरों की मरम्मत की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा कर फटकार लगाई। साथ ही जांच के आदेश दिए। हालांकि जांच का मामला अभी ठंडे बस्ते में चला गया है। अभी तक टीम तक का गठन नहीं किया जा सका है।
250 ट्रांसफाॅर्मर स्टॉक में
गर्मी में ट्रांसफाॅर्मरों की किल्लत न होने पाए इसके लिए कार्यशाला पर खराब ट्रांसफाॅर्मरोंं की मरम्मत का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। 100 से लेकर 400 केवीए के 250 ट्रांसफाॅर्मरों का स्टॉक कार्यशाला में मौजूद है। ऐसे में ट्रांसफाॅर्मर खराब होने की दशा में तत्काल उसे बदलवा दिया जाता है। इसके बाद खराब ट्रांसफाॅर्मरों की मरम्मत कर उसे कार्यशाला के गोदाम में सुरक्षित रख लिया जाता है।
कराई जाएगी जांच
ट्रांसफाॅर्मर फुंकने का सिलसिला इन दिनों तेज से बढ़ा है। कार्यशाला के जेई को मरम्मत की गुणवत्ता में पूरी सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। समय-समय पर मरम्मत की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होगी। -राजकुमार त्रिपाठी, अधीक्षण अभियंता