बताते चलें कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका में कहा गया था कि ईंट भट्ठा के संचालन के दौरान चिमनी से निकलने वाले धुएं से कार्बन, सल्फर, नाइट्रोजन के आक्साइड व मोनोआक्साइड गैस निकलती है, जो मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
इसके अलावा ओजोन को भी नुकसान पहुंच रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने केंद्र सरकार को एनओसी के बगैर ईंट भट्ठा संचालन पर रोक लगाए जाने का निर्देश दिया है। इस पर पर्यावरण विभाग ने कहा कि जब तक एनओसी नहीं लिया जाता, तब तक ईंट भट्ठों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा।
इसके चलते बीते लगभग तीन माह से जिले के लगभग 350 ईंट भट्ठों का संचालन पूरी तरह ठप पड़ गया है। इससे एक तरफ जहां ईंट की पथाई का कार्य नहीं हो रहा है, वहीं इन भट्ठों पर कार्य करने वाले 70 हजार से अधिक मजदूर पूरी तरह बेरोजगार हो गए हैं।
ईंट भट्ठा एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष श्रीराम वर्मा ने कहा कि ईंट भट्ठा का संचालन ठप होने से एक तरफ व्यवसायियों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, वहीं मजदूरों को भी विभिन्न प्रकार की समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। कहा कि संगठन ने इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।