अंबेडकरनगर। बीते दो साल में जिले से मानवाधिकार हनन के 72 मामले मानवाधिकार आयोग तक पहुंचे। इनमें से पांच में अब भी आयोग को पुलिस की रिपोर्ट भेजी जानी बाकी है, जबकि अन्य मामलों में आयोग के निर्देशानुसार जरूरी जांच रिपोर्ट व कार्रवाई पूरी की जा चुकी है। खास बात यह है कि इन दो सालों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की तरफ से संदर्भित कोई भी मामला जिले में नहीं पहुंचा है। सभी मामले राज्य मानवाधिकार आयोग द्वारा ही जिले में भेजे गए।
मानवाधिकार हनन के मामले जिले में भी कम नहीं हैं। बुधवार को मानवाधिकार दिवस है। जाहिर तौर पर यह वह दिन है, जब मानवाधिकारों को लेकर सभी तरफ से गंभीर विमर्श व चिंताएं सामने आती हैं। हालांकि जमीनीस्तर पर इसका अनुपालन पूरी तरह संभव नहीं हो पाता। बीते दो वर्ष के आंकड़ों पर गौर फरमाया जाए, तो कुल 72 मामले राज्य मानवाधिकार की दहलीज तक पहुंचे। मानवाधिकार आयोग ने इन सभी मामलों को संबंधित थानों में जांच में भेजकर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया। इनमें से 67 मामलों की जांच रिपोर्ट राज्य मानवाधिकार को सौंप दी गई। पांच मामले अभी भी लंबित हैं।
एसपी कार्यालय के कर्मचारी एचके मिश्र ने बताया कि 2018-19 में 37 जबकि 2019-20 में 35 मामले आए। 2018-19 के सभी मामलों की रिपोर्ट भेज दी गई जबकि 2019-20 के 35 मामलों के सापेक्ष 30 की रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। पांच मामलों की रिपोर्ट नहीं भेजी जा सकी है, उनमें टांडा कोतवाली क्षेत्र के सिकंदराबाद निवासी शमशीर आलम, आलापुर तहसील क्षेत्र के दिलावलपुर निवासी लीलावती, महरुआ थाना क्षेत्र के मथानी निवासी राधेश्याम, अहिरौली थाना क्षेत्र के प्रतापपुर चमुर्खा निवासी रामचंदर यादव, आलापुर थाना क्षेत्र के अमोला बुजुर्ग निवासी मोहम्मद रेहान शामिल हैं। इसमें अमोला बुजुर्ग मामले की जांच जहां सीओ सिटी कर रहे, वहीं अन्य की जांच संबंधित सर्किल के सीओ कर रहे हैं। खास बात यह कि राष्ट्रीय मानवाधिकार हनन का जिले में कोई भी मामला नहीं है। जो मामले आए हैं वे सभी राज्य मानवाधिकार आयोग के हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि मानवाधिकार हनन मामलों के निस्तारण में किसी तरह की हीलाहवाली नहीं करनी चाहिए। ऐसे में मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए, जिससे पीड़ित को अति शीघ्र न्याय मिल सके। कहा कि मानवाधिकार दिवस के मौके पर सिर्फ गोष्ठी कर उस पर प्रकाश ही नहीं डालना चाहिए, बल्कि मानवाधिकार हनन न हो, इसे लेकर जिम्मेदार लोगों को गंभीरता दिखानी होगी। जब तक ठोस कदम नहीं उठाया जाएगा तब तक हनन के मामलों पर अंकुश नहीं लग सकेगा।
राज्य मानवाधिकार आयोग से पिछले दो सालों में 72 मामले जांच के लिए जिले में आए थे। 67 मामलों की जांचकर रिपोर्ट भेज दी गई है। जो पांच मामले लंबित हैं, उनकी जांच चल रही है। जल्द ही इसे भी पूरा कर लिया जाएगा पूरा कर भेज दिया जाएगा।
आलोक प्रियदर्शी, एसपी