लापरवाही यह कि सिर्फ ढीले हुए एक तार की वजह से अकबरपुर नगर के एक आवास में अर्थिंग जाने लगा था। रात में ही यह गड़बड़ी दूर न किए जाने की वजह से मरैला, जाफरगंज व बेवाना उपकेंद्र से जुड़ी विद्युत आपूर्ति शनिवार को पूरी रात बंद रही। दोपहर को गड़बड़ी दूर होने के बाद आपूर्ति बहाल हो सकी।
पूरे जिले में विद्युत आपूर्ति को लेकर मचे संकट के बावजूद विद्युत कर्मियों की मनमानी और अधिकारियों की उदासीनता दूर नहीं हो रही है। अधिकारियों का कोई नियंत्रण अधीनस्थ अवर अभियंताओं व लाइनमैनों पर नहीं रह गया है।
अधिशाषी अभियंताओं व उपखण्ड अधिकारियों की शिथिलता का ही नतीजा है कि अक्सर अवर अभियंता अपने क्षेत्र में कोई गड़बड़ी होने पर खुद पहुंचने की बजाए लाइनमैनों को निर्देशित कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं। रात के अंधेरे में अक्सर मामूली गड़बड़ी दूर करने की तो जहमत नहीं उठाई जाती। इ
बताते हैं कि देर रात 132 केवी उपकेंद्र से मरैला को जाने वाली विद्युत लाइन का तार अकबरपुर नगर में पटेलनगर के निकट ढीला होकर नीचे लटक गया। इससे वहां एक राजस्वकर्मी के घर से तार सट गया। इससे अर्थिंग के चलते घर में कई उपकरण जल गए।
पावर कॉर्पोरेशन को सूचना दी गई पर कर्मियों ने तार को घर से दूर करने के बजाए आपूर्ति ही ठप देना उचित समझा। नतीजतन समूचे मरैला उपकेंद्र की विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। इससे अकबरपुर नगर के शहजादपुर क्षेत्र में कई मोहल्लों में अंधेरा छा गया।
रविवार प्रात: भी विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो दर्जनों घरों में पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया। कई घरों के इन्वर्टर तक जवाब दे गए। लापरवाही का खामियाजा सिर्फ मरैला उपकेंद्र ही नहीं, जाफरगंज व बेवाना उपकेंद्र के उपभोक्ताओं को भी भुगतना पड़ा।
मरैला विद्युत उपकेंद्र के शहरी उपभोक्ताओं के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को भी पूरी रात बिजली के बिना ही गुुजारना पड़ा। यही हाल अन्य दोनों उपकेंद्र के भी उपभोक्ताओं का रहा। लगभग 60 हजार की आबादी ऐसे में बिजली के इंतजार में ही पूरी रात बिताने को विवश हुई।