सर्व शिक्षा अभियान योजना के तहत जिले में वर्ष 2011-12 व 2012-13 में 102 विद्यालयों के निर्माण की स्वीकृति शासन से मिली थी। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण अब तक 30 विद्यालयों के निर्माण के लिए भूमि का ही आवंटन नहीं हो सका है।
तमाम दिशा निर्देेश के बाद भी राजस्व विभाग अब तक शिक्षा विभाग को भूमि नहीं उपलब्ध करा सका। विद्यालय का निर्माण न होने से छात्र-छात्राओं को शिक्षा के लिए भटकने के लिए मजबूरहोना पड़ रहा है। वहीं, विभाग के खाते में 1 करोड़ 92 लाख 24 हजार 300 रुपये धनराशि को व्यय होने का इंतजार है।
छात्र-छात्राओं को गांव में प्राथमिक स्तर तक की शिक्षा ग्रहण करने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में 102 नए विद्यालय भवन के निर्माण का निर्णय लिया था। विद्यालय निर्माण में समस्या न हो, इसके लिए प्रति विद्यालय 6 लाख 40 हजार 810 रुपये की दर से धनराशि भी विभाग को उपलब्ध करा दी।
इससे उन गांवों के छात्र-छात्राओं में खुशी की लहर दौड़ गई, जहां प्राथमिक स्तर की शिक्षा ग्रहण करने के लिए दौड़ लगानी पड़ रही थी। उन अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली जो गांव में विद्यालय न होने पर बच्चों को दूर दराज स्थित विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए नहीं भेज पा रहे थे।
विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण करीब चार साल बाद भी विद्यालयों का निर्माण नहीं हो सका है। अब तक मात्र 72 विद्यालयों का ही निर्माण हो सका है। शेष 30 विद्यालयों का निर्माण महज इसलिए नहीं शुरू हो सका है क्योंकि इसके लिए राजस्व विभाग भूमि ही उपलब्ध नहीं करा सका है।