आंगनबाड़ी कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जिले के दो हजार 548 आंगनबाड़ी केंद्र ठप पड़ गए हैं। दो दिन से इन सभी केंद्रों पर बच्चों को पुष्टाहार व हाॅटकुक्ड नहीं मिल पाया है। महिला कर्मचारियों के रुख से लगता है कि रविवार के अवकाश के बाद भी आंगनबाड़ी केंद्र खुल नहीं पाएंगे। ऐसे में इसका सीधा खामियाजा इन केंद्रों पर पंजीकृत लगभग तीन लाख बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
हौसला पोषण योजना से जुड़ी 10 हजार गर्भवती को भी भोजन नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि नियमित किए जाने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कर्मचारी व सहायिका दो दिनों से हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को पहले दिन कार्य बहिष्कार करते हुए जिले के सभी नौ ब्लॉकों के आंगनबाड़ी कर्मचारियों व कार्यकर्त्रियों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया था तो दूसरे दिन भी कार्य बहिष्कार जारी रखते हुए तहसील मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया गया।
इस आंदोलन के चलते जिले के सभी दो हजार 548 आंगनबाड़ी केंद्र ठप पड़ गए हैं। इन केंद्रों पर लगभग 2100 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री तथा 1950 सहायिकाएं कार्यरत हैं। सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री व सहायिकाओं के हड़ताल पर चले जाने के कारण केंद्रों पर बच्चों को हाॅटकुक्ड व पुष्टाहार दिए जाने का कार्य रुक गया है। केंद्रों पर पहुंचने वाले बच्चों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
अमर उजाला टीम ने हड़ताल के मद्देनजर हालात का जायजा लिया तो सभी केंद्रों पर ताला लटकता नजर आया। अकबरपुर नगर के निकट कटरिया याकूबपुर केंद्र पर ताला लटक रहा था। वहां मिले ग्रामीण शिवदयाल ने कहा कि वैसे भी यह केंद्र कम ही खुलता है लेकिन दो दिन से यहां कोई नहीं आया है। टांडा ब्लॉक के फूलपुर केंद्र का भी यही हाल था। दो दिन से वहां भी ताला लटक रहा है।
जलालपुर तहसील के वाजिदपुर के भी केंद्र पर ताला लटकता मिला। ग्रामीणों ने बताया कि यहां तो चार दिन से कोई कर्मचारी नहीं पहुंची हैं। कई अन्य केंद्रों का भी यही हाल रहा। इस बीच आंगनबाड़ी केंद्रों के ठप रहने का सीधा खामियाजा सभी केंद्रों पर पंजीकृत लगभग तीन लाख बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। कारण यह कि वे पुष्टाहार व हाॅटकुक्ड से सीधे तौर पर वंचित हैं।
इन दिनों कार्यकर्त्री व सहायिका जिस मुस्तैदी से हड़ताल पर डटी हुई हैं, उससे यही लगता है कि रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को भी आंगनबाड़ी केंद्र ठप रहेंगे। उधर, आंगनबाड़ी केंद्रों के न खुलने से हौसला पोषण योजना को भी धक्का लगने की आशंका है। दरअसल इन केंद्रों पर बुधवार को महिलाओं को पौष्टिक आहार दिए जाने की योजना है।
हड़ताल लंबी चली तो इन केंद्रों पर पंजीकृत लगभग दस हजार गर्भवती को हड़ताल का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश प्रताप सिंह ने बताया कि हड़ताल के चलते दो दिन से सभी 2548 आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं। इसका असर शून्य से छह वर्ष तक के लगभग तीन लाख बच्चों पर पड़ रहा है। हड़ताल समाप्त होते ही पुष्टाहार व हाटकुक्ड का लाभ तत्परतापूर्वक दिलाया जाएगा।