विभिन्न तहसीलों में एक वर्ष के अंदर आयोजित हुए तहसील दिवसों में 10 हजार से अधिक फरियारियों ने शिकायत दर्ज कराई, लेकिन समय सीमा पूर्ण होने के बाद भी तहसील प्रशसन 289 मामलों का निस्तारण नहीं हो सका है। इसी लापरवाही के चलते तहसील दिवसों में आने वाली शिकायतों की संख्या में भी कमी आ रही है।
मालूम हो कि शासन स्तर से आम जनता की समस्याओं को तत्काल निस्तारित करने की व्यवस्था शुरू की गई है। सभी तहसीलों में माह के दो मंगलवार को तहसील दिवस आयोजित होता है। इसमें पीड़ितों की शिकायत को प्रमुखता के आधार पर निस्तारित करने का आदेश है।
शासन के निर्देश के मुताबिक शिकायतकर्ता द्वारा की गई शिकायत को 15 दिन के अंदर निस्तारित करते हुए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाए। जिले की पांचों तहसीलों में गत 6 जनवरी 2015 से 19 जनवरी 2016 के बीच 10 हजार 664 शिकायतें आयी थीं।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इनमें से अब तक 289 मामलों का निस्तारण नहीं हो सका है। गौरतलब यह है कि इनमें से 45 मामले ऐसे हैं जिनका तहसील प्रशासन करीब 6 माह की समयवधि बीत जाने के बाद भी निस्तारित नहीं कर सका है। इनमें अकबरपुर तहसील के 12, आलापुर के 3, जलालपुर के 22, टांडा व भीटी में 4-4 मामले अतिलम्बित श्रेणी में चल रहे हैं।
तहसील प्रशासन के पास ऐसे भी कई मामले लम्बित हैं जिनकी निर्धारित समय सीमा बीत चुकी है। पिछले एक वर्ष के आंकड़े के मुताबिक अकबरपुर तहसील में 2105 शिकायतें आयीं, जिनमें से 45 निस्तारित नहीं हो सकी हैं।
इसी तरह आलापुर में 2601 में से 66, जलालपुर में 2463 में से 73, टांडा में 1985 में से 60 व भीटी के 1510 मामलों में से 4 शिकायतों का निस्तारण तहसील प्रशासन नहीं कर पा रहा है।
इससे वादकारियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। अकबरपुर के मानवेन्द्र पांडेय कहते हैं कि अधिकारियों की इसी उदासीनता के चलते तहसील दिवसों में शिकायतें भी कम आना शुुरु हुई हैं।
शुकुलबाजार के रामचन्द्र जायसवाल के मुुताबिक तहसील दिव सों में आने वाली शिकायतों का निस्तारण आमतौर पर कागजों पर ही ज्यादा होता है। इसके कारण ही शिकायतों के निस्तारण को लेकर लोग इधर उधर दौड़ते रहते हैं।