खास बात तो यह कि इस बीमारी के उपचार के लिए महज एक चिकित्सक उपलब्ध है। ऐसे में यदि वह किसी कारणवश अवकाश पर चले जाएं तो इस बीमारी से पीड़ित मरीजों के जिला अस्पताल पहुंचने पर इलाज की व्यवस्था रामभरोसे ही है।
अस्पताल प्रशासन बीते दिनों यहां कम से कम दो हृदय रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग कर चुका है, लेकिन अब तक तैनाती नहीं हो सकी है। यही हाल अन्य बीमारियों को लेकर भी है। अस्पताल भले ही सभी आवश्यक प्रबंध होने का दावा कर रहा होे, लेकिन स्थिति इससे जुदा है।
मौसम में परिवर्तन होने के साथ ही तमाम बीमारियों के रोगियों की संख्या अस्पतालों में बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में कड़ाके की ठंड के बीच इन दिनों जिला अस्पताल में अन्य रोगियों की अपेक्षा हृदय व श्वास रोगियों की संख्या बढ़ी है।
इन मरीजों के समुचित उपचार का दावा तो जिला अस्पताल प्रशासन कर रहा है, परन्तु अस्पताल प्रशासन के पास उपलब्ध संसाधन व मौजूदा चिकित्सकों की संख्या पर्याप्त नहीं है। बताते चलें कि जिला अस्पताल में हृदय एवं श्वास रोग के एक मात्र चिकित्सक डॉ डीपी वर्मा तैनात हैं।
वे यूं तो लगातार अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते नजर आते हैं, लेकिन उनके अवकाश लेने या फिर किसी कार्य से बाहर चले जाने पर मुश्किल खड़ी हो जाती है।
जिला अस्पताल प्रशासन ने बीते दिनों ही श्वास व हृदय रोग के दो अतिरिक्त चिकित्सकों की तैनाती का मांग पत्र निदेशालय को भेज रखा है, लेकिन उस पर अब तक अमल नहीं हो सकी है। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को प्रतिदिन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल के आंकड़ों पर ही गौर करें तो हृदय व श्वास रोग के प्रतिदिन 50 से अधिक मरीज आ रहे हैं। जबकि अन्य मौसम में इनकी संख्या 15 से 20 तक ही रहती है। जिला अस्पताल में अपने मरीज को भर्ती कराए तीमारदार बृजेश कुमार की मानें तो अस्पताल के पास इस बीमारियों के समुचित उपचार करने की सुविधा ही नहीं है।
ओपीडी में मरीजों को तो भटकना ही पड़ता है। भर्ती होने वाले मरीजों का भी सही से उपचार नहीं हो पाता। व्यस्तता के चलते चिकित्सक समय ही नहीं दे पाते। एक अन्य तीमारदार पंकज वर्मा के मुताबिक जिला अस्पताल में कम से कम तीन या चार चिकित्सक तो हृदयरोग के होने ही चाहिए।