अंबेडकरनगर। खरीफ में फसल लेने के बाद किसान खाली खेतों में दलहनी और तिलहनी फसलें बोकर अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राजकीय कृषि बीज केंद्रों पर तोरिया (लाही) की 250 मिनी किट पहुंच गए हैं। जिन किसानों ने आवेदन किया है वे अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर किट प्राप्त कर सकते हैं।
जल्द तोरिया की फसल बो देने वाले किसान रबी में गेहूं की फसल भी समय से बो सकते हैं। यह तरीका खरीफ में हुए घाटे की भरपाई करने में कारगर है। एक समय बारिश कम होने से किसानों को दिक्कत हुई थी, लेकिन अब जिले के ज्यादातर हिस्सों में मूसलाधार बरसात के बाद यह दिक्कत दूर हो गई है। जिला कृषि अधिकारी अरविंद चौधरी ने बताया कि किसान खाली खेतों में हल्की जुताई के बाद पाटा लगाकर पुन: जुताई करके तोरिया, सरसो, मटर, मसूर आदि की बोआई आगामी दिनों कर सकते हैं। तोरिया के चार किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेअर के लिए पर्याप्त है। दलहनी फसलों की बोआई से पहले बीजों का राइजोबियम कल्चर से उपचार करने से उत्पादन बढ़ जाता है।