आलापुर (अंबेडकरनगर)। श्रावण मास में बाबा विशेश्वरनाथ मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया है। रामनगर बाजार स्थित यह शिवालय न केवल पूजन स्थल है, बल्कि इसके निर्माण से जुड़ी कहानी इसे विशेष बनाती है। बताया जाता है कि 22 वर्ष पहले था यहां सर्पों का बसेरा था, अब यह स्थान भक्तों की आस्था का प्रतीक बन चुका है।
वर्ष 2003 में रामनगर मसेना मिर्जापुर निवासी अजय जायसवाल अपने घर का निर्माण कार्य शुरू कर रहे थे। नींव की खोदाई के दौरान प्रतिदिन सांप निकलने लगे थे। परिजन भयभीत हो उठे। समाधान की खोज में अजय जायसवाल ने वाराणसी के पुरोहितों से परामर्श लिया। उन्हें सलाह मिली कि पहले उस स्थान पर शिव मंदिर बनवाएं, फिर गृह निर्माण करें। अजय जायसवाल ने तुरंत निर्माण रोकवाया। पहले बाबा विशेश्वरनाथ का मंदिर बनवाया। यह शिवलिंग शेषनाग की छत्रछाया में स्थापित है। इसके बाद जब मकान बना तो समस्या समाप्त हो गई। सर्पों की समस्या से शुरू हुई यह धार्मिक यात्रा अब विशेश्वरनाथ धाम को जिले का प्रमुख शिवालय बना चुकी है। सावन में आस्था का केंद्र यह मंदिर, संकटमोचन शिव की साक्षात उपस्थिति का प्रतीक है।
यहां बढ़ता है मनोबल
मंदिर के प्रधान पुजारी साधुराम गोस्वामी और सालिकराम गोस्वामी के अनुसार श्रावण मास में शिवभक्ति करने से मनोबल, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन बढ़ता है। सोमवार के दिन मंदिर में जलाभिषेक, मंत्रोच्चार और विशेष पूजन के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष बात यह है कि यहां आने वाले श्रद्धालु धार्मिक पूजन के साथ-साथ समस्याओं के समाधान की भी उम्मीद लेकर आते हैं। जलाभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप को मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और पारिवारिक अशांति के निदान का मार्ग माना जा रहा है।