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सीएचसी में नहीं हैं आंख व दांत के चिकित्सक, मरीज हो रहे परेशान

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विद्युतनगर। कहने को तो टांडा में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इलाके के एक लाख लोगों की सेहत की जिम्मेदारी है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हो पा रहा है। यहां डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की कमी के अलावा दवाओं का भी टोटा बना हुआ है। कई रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से ज्यादातर मरीजों को बिना इलाज ही मायूस होकर लौटना पड़ता है।
टांडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर करीब एक लाख से अधिक की आबादी को सेवाएं देने की जिम्मेदारी है। हालांकि, मौजूदा समय में सीएचसी को खुद ही इलाज की आवश्यकता है। अस्पताल कई अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है।
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शासन ने यहां के लिए एक सर्जन, एक डेंटल सर्जन, एक बालरोग विशेषज्ञ, एक फिजीशियन, एक नेत्र रोग विशेषज्ञ, एक महिला चिकित्सक, एक चीफ फार्मासिस्ट, तीन स्टाफ नर्स, एक लैब टेक्नीशियन, एक एक्स-रे/ईसीजी टेक्नीशियन, एक डेंटल हाइजीनिस्ट, चार वार्ड ब्वॉय, चार स्वीपर व एक डीसी का पद सृजित किया है। इसमें नेत्र व दंत रोग विशेषज्ञ का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है।
इसके अलावा आर्थोपेडिक सर्जन व रेडियोलॉजिस्ट का पद भी खाली है। वार्ड ब्वॉय का एक व स्वीपर के तीन पद पर भी तैनाती नहीं है। ऐसे में मरीजोें को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
30 बेड के इस अस्पताल में दवाओं का भी टोटा है। यहां हर दिन औसतन 250 मरीज पहुंचते हैं। बेहतर सेवाएं न मिल पाने की वजह से मरीज परेशान रहते हैं। मरीजों का आरोप है कि तमाम दावों के बावजूद मरीजों को आज भी अधिकतर दवाइयां बाहर से ही खरीदनी पड़ती है।
रामजतन, सुधीर चौधरी, अंकित यादव, आशुतोष गुप्त, मोहम्मद आसिफ आदि ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से व्यवस्था में सुधार कराने की मांग की है। कहा कि सरकारी अस्पताल में बेहतर सुविधा न मिलने की वजह से मरीजों को निजी अस्पतालों की तरफ रुख करना पड़ता है। निजी अस्पतालों में मरीजों का जमकर शोषण किया जाता है।
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अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास रहता है। रिक्त पदों के बावत विभाग को अवगत कराया जा चुका है। तैनाती करना शासन का काम है।
- जयप्रकाश, सीएचसी अधीक्षक
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