अंबेडकरनगर। शराब के अवैध कारोबार को कुचलने तथा इसमें लिप्त लोगों को कड़ी सजा दिलाने को लेकर जिले में आबकारी महकमा रस्म अदायगी से आगे बढ़ता नहीं दिखता। पूर्व में एसडीएम व सीओ के साथ आबकारी टीम के औचक निरीक्षणों का अभियान चला भी तो खानापूरी से ज्यादा कुछ नहीं रहा।
माझा क्षेत्रों के अलावा एक दर्जन से अधिक ऐसे गांव हैं, जहां धड़ल्ले से कच्ची शराब तैयार की जाती है। विभाग के संज्ञान में यह सब कुछ होता है, लेकिन कार्रवाई की सुध तभी आती है जब किसी जनपद में कोई बड़ा हादसा हो जाता है। ऐसे मौकों पर छिटपुट कार्रवाई के बाद आबकारी महकमा एक बार फिर से पुराने ढर्रे पर लौट जाता है।
मादक पदार्थों के अवैध धंधे का खेल सिर्फ बाराबंकी तक ही सीमित नहीं। कच्ची शराब का अवैध कारोबार जिले में भी तेजी से फलफूल रहा है। इस पर अंकुश पाने को लेकर आबकारी विभाग वर्ष के ज्यादातर दिनों में लापरवाह बना रहता है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लंबे समय से ऐसे कारोबार पर अंकुश पाने के लिए बड़ा अभियान नहीं चल सका है।
शासन के तमाम दिशा निर्देश के बाद यदि अभियान चलता भी है, तो महज औपचारिकता ही निभाई जाती है। नतीजा यह है कि इसमें लिप्त लोगों के हौसले बुलंद हैं और बेधड़क होकर अवैध शराब का कारोबार कर रहे हैं। बताते चलें कि जिले में मादक पदार्थों की कुल 320 दुकानें संचालित हैं। इसमें देशी शराब की 156, विदेशी शराब की 38, बीयर की 30, मॉडल शॉप 4, बार 1, ताड़ी की 58 व भांग की 33 दुकानें शामिल हैं।
अवैध शराब की बिक्री को लेकर आबकारी विभाग कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले के अहिरौली थाना क्षेत्र सोनावां गांव में लगभग 4 वर्ष पूर्व एक बंद पड़ी राइस मिल में अवैध शराब का कारखाना धड़ल्ले से संचालित हो रहा था, लेकिन इसकी भनक तक जिले के आबकारी विभाग को नहीं हो सकी। गोरखपुर की एसटीएफ ने छापेमारी कर अवैध शराब के बड़े कारोबार का पर्दाफाश किया था। छापेमारी में बड़ी मात्रा में अवैध शराब के साथ असलहा भी बरामद हुआ था। दो की गिरफ्तारी भी हुई थी।
इसके अलावा बेवाना थाना क्षेत्र में बगैर लाइसेंस के शराब की बिक्री एक दुकान से होती पाई गई थी। ग्रामीणों के हंगामें के बाद दुकान बंद कराई गई लगभग दो वर्ष पूर्व सहतूगंज में कच्ची शराब पीने से एक युवक की मौत भी हो गई थी।
अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाई महज कागजों तक ही सीमित है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार गत अप्रैल से अब तक कुल 483 स्थानों पर छापेमारी की गई। 83 स्थानों पर अवैध ढंग से शराब बनते मिली। 1 हजार 886 लीटर अवैध शराब बरामद हुई। शराब के अवैध कारोबार में लिप्त 22 लोगों की गिरफ्तारी की गई। इसके अलावा 230 लाइसेंसी दुकानों की भी जांच की गई। 37 दुकानों पर अभिलेख आधे अधूरे मिले। इस पर उन्हें जरूरी कागजात पूर्ण किए जाने का निर्देश दिया गया।
कच्ची शराब बनाने का ज्यादातर कार्य सरयू नदी के किनारे माझा क्षेत्र में होता है। जहांगीरगंज थाना क्षेत्र के कछार क्षेत्र में अवैध ढंग से शराब का कारोबार किया जाता है। बताया जाता है कि कछार क्षेत्र से सटे गोरखपुर जनपद में अवैध शराब का निर्माण होता है, जिसकी बिक्री जहांगीरगंज के कछार क्षेत्र में किया जाता है।
राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के कम्हरिया, बंगालपुर व माझा क्षेत्र के अलाव टांडा कोतवाली क्षेत्र के माझा क्षेत्र में कच्ची शराब का कारोबार होता है। अकबरपुर व कटेहरी समेत जलालपुर के आधा दर्जन से अधिक गांव भी अवैध शराब के केंद्र बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में आबकारी विभाग द्वारा लंबे समय से बड़ा अभियान नहीं चलाया जा सका है।
अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए समय समय पर अभियान चलता रहता है। इसमें सफलता भी मिलती है। मंगलवार को भी जिला मुख्यालय व इसके इर्दगिर्द की शराब की दुकानों पर जांच अभियान चला। कहीं से किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत सामने नहीं आई।
राजकुमार, जिला आबकारी अधिकारी