अंबेडकरनगर। बिजली व्यवस्था को बेहतर करने के मामले में बिजली विभाग फेल नजर आ रहा है। अघोषित विद्युत कटौती व आए दिन होने वाले फॉल्ट ने आपूर्ति व्यवस्था ही पटरी से उतार दी है। ऐसे में विकल्प के तौर पर लोगों का इनवर्टर व सोलर पैनलों पर भरोसा बढ़ा है। नतीजतन इनकी मांग में तेजी से इजाफा हुआ है। बीते साल के सापेक्ष इस बार इन उपकरणों में लगभग दो हजार रुपए का अंतर हो गया है।
शासन के अनुसार शहरी क्षेत्र में 24 घंटे तो ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति देने का रोस्टर है, लेकिन इसका पालन नहीं कराया जा रहा है। जर्जर बिजली उपकरणों की वजह से आपूर्ति बाधित होती रहती हैं। अक्सर तारों के टूटकर गिरने या फिर ट्रांसफार्मर फुंक जाने से आपूर्ति बाधित हो जाती है।
कई बार तो उपकेंद्र में ही गड़बड़ी आ जाने पर कई-कई घंटे उपभोक्ता आपूर्ति से वंचित रह जाते हैं। साथ ही मैन पॉवर का संकट भी सुचारु विद्युत आपूर्ति में बाधक है। पर्याप्त लाइनमैन न होने के कारण सूचना के बावजूद वे समय से मौके पर नहीं पहुंच पाते हैं। इसके चलते कई बार छोटी-छोटी गड़बड़ियां ही ठीक नहीं हो पाती हैं।
अकबरपुर नगर के टाउन फीडर से जुडे़ दोस्तपुर रोड निवासी उपभोक्ता सत्यप्रकाश व दिलीप कुमार वर्मा का कहना है कि बिल में बढ़ोतरी करने के साथ ही व्यवस्थाओं में सुधार की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। मौजूदा समय में सामान्य उपभोक्ताओं के बिलों में काफी इजाफा कर दिया गया है, लेकिन आपूर्ति की दशा जस की तस है। सप्ताह भर भी बिजली सुचारु ढंग से नहीं चल पाती।
कहीं न कहीं तार टूटने या फिर अन्य खामियों से आपूर्ति बाधित हो जाती है। उपभोक्ताओं को स्वयं चंदा एकत्रित कर गड़बड़ी दूर कराने के लिए निजी लाइनमैनों का सहारा लेना पड़ता है। अकबरपुर के शजादपुर निवासी रामसजीवन व अखिलेश सिंह का कहना कि विद्युत की बदहाली के चलते ही लोग वैकल्पिक ऊर्जा श्रोतों की तरफ बढ़ने को विवश हैं। इनवर्टर व सोलर पैनल की खरीददारी इसके चलते ही तेजी से बढ़ी है। अकबरपुर के प्रमुख व्यवसायी धीरेंद्र वर्मा ने बताया कि इस बार अब तक 25 इनवर्टर व सोलर पैनल बिक गए हैं। बीते वर्ष सिर्फ 16 की ही बिक्री हुई थी। एक अन्य व्यवसायी एसके त्रिपाठी ने बताया कि एक किलोवॉट से लेकर 3 किलोवॉट तक के इनवर्टर व सोलर पैनल की बिक्री में इस बार तेजी आयी है।
जिला मुख्यालय का उपकेंद्र हो या ग्रामीण क्षेत्र के। सभी पर लाइनमैनों के अलावा कर्मचारियों का टोटा है। पर्याप्त मैनपॉवर न होने के चलते भी अघोषित कटौती कई बार लम्बी खिंच जाती है। उपभोक्ता जमुनीपुर के जितेन्द्र वर्मा व मनोज जायसवाल का कहना है कि विभाग के पास अपने कर्मचारी ही पर्याप्त नहीं हो तो व्यवस्था क्या बेहतर देंगे।
निजी लाइनमैन ही आपूर्ति बहाल कराने में मददगार साबित हो रहे हैं। यह बात अलग है कि इसके लिए उपभोक्ताओं को ही अपनी जेबें ढीली करनी पड़ती है। विभाग को इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि यदि बिल में बढ़ोत्तरी हुई है तो सुविधाओं में भी बढ़ोत्तरी हो।
अधिशासी अभियंता वीके पटेल ने बताया कि विद्युत व्यवस्था में पहले की तुलना में काफी सुधार किया गया है। उपभोक्ताओं से मिलने वाली शिकायत व टीम के सर्वे के बाद पिछले करीब दो माह में 150 ऐसे स्थानों पर अलग-अलग क्षमता के नए ट्रांसफार्मर लगाए गए, जहां पहले से लगे ट्रांसफार्मर ओवरलोड थे।
यह कार्य मौजूदा समय में भी चल रहा है। इसके अलावा जर्जर विद्युत तार व खंभे भी बड़े पैमाने पर शहरी क्षेत्रों में बदले गए हैं। आने वाले दिनों में व्यवस्था में और सुधार देखने को मिलेगा।