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मण्डी समिति अकबरपुर में दुकानदारों से अवैध वसूली का भण्डाफोड़

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अंबेडकरनगर। नवीन मंडी समिति अकबरपुर में दुकानदारों से अवैध वसूली का पर्दाफाश हुआ है। यह वसूली लगभग 200 ऐसी दुकानों से की जा रही हैं, जिन्हें लाइसेंस नहीं मिला है। मंडी समिति के ही एक कर्मचारी द्वारा इन दुकानदारों से अवैध रकम ली जाती है। अमर उजाला के हाथ मंगलवार को कर्मचारी के ऐसे कई वीडियो हाथ लगे हैं, जिसमें वह बेखौफ होकर वसूली कर रहा है।
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यह वसूली नियमित होती है। इसका अंदाजा किसी भी वीडियो को देखने पर सहज ही हो जाता है। कर्मचारी के पहुंचते ही सब्जी के थोक व फुटकर विक्रेता बिना उसके कहे पैसा निकालना शुरू कर देते हैं। बताया जाता है कि कर्मचारी की इस वसूली को कई अधिकारियों का भी संरक्षण प्राप्त है। बड़ा सवाल यह है कि मंडी समिति में तैनात अधिकारियों को इसकी जानकारी आखिर क्यों नहीं हो पाई, जबकि उनका कार्यालय मंडी समिति परिसर में ही स्थित है।

जिला मुख्यालय स्थित कृषि उत्पादन मंडी समिति में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा हुआ है। कहने को तो मंडी समिति परिसर में 233 थोक व फुटकर दुकानों को लाइसेंस प्राप्त है, लेकिन जिम्मेदार लोगोें के संरक्षण में 200 से अधिक ठेला व अन्य अस्थायी ऐसी दुकानें संचालित हो रही हैं, जिन्हें लाइसेंस नहीं मिला है।
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ऐसी दुकानों से प्रतिदिन मंडी समिति के कर्मचारियों द्वारा अवैध वसूली की जा रही है। किसी दुकानदार से 20 रुपये, तो किसी से 50 रुपये तक की दैनिक वसूली की जाती है। दुकानदारों से अवैध वसूली किए जाने के आधा दर्जन से अधिक वीडियो मंगलवार को अमर उजाला के हाथ लगे हैं।

इन वीडियो में साफ तौर पर देखा जा रहा है कि मंडी अभिरक्षक विजय तिवारी हाथ में काली थैली लिए एक दुकान से दूसरी दुकान पर पहुंच रहा है। मंडी अभिरक्षक इन दुकानदारों से रुपये लेकर थैली में डालता जा रहा है। सभी वीडियो में इसी तरह की वसूली देखने को मिली है।

एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर अमर उजाला टीम को बताया कि अरसे से बगैर लाइसेंस की दुकानों से इसी प्रकार से अवैध वसूली की जाती है। इसका लाइसेंसधारी दुकानदारों पर प्रतिकूल प्र्रभाव पड़ रहा है। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सुबह से ही शुरू हो जाती है वसूली
केले का ठेला लगाने वाले एक दुकानदार ने कहा कि सुबह जब दुकानें सज जाती हैं, तो मंडी अभिरक्षक हाथों में थैली लेकर निकल पड़ते हैं। लगभग 200 बगैर लाइसेंस की छोटी-बड़ी दुकानों से उसके द्वारा सामग्री के अनुसार 20 से 50 रुपये तक की राशि वसूली जाती है। यदि कोई दुकानदार ज्यादा अधिक मात्रा में सामान लेकर आया, तो उससे 100 रुपये तक वसूले जाते हैं। यदि वह इसका विरोध करता है, तो मंडी अभिरक्षक उन्हें ऊपर भी पैसा देने की बात कहकर फटकार लगाता है और पैसा देने का दबाव बनाता है। कहा कि वसूली के दौरान मंडी समिति में तैनात एक गार्ड भी उनके साथ रहता है।

मंडी समिति से जुड़े अधिकारियों पर सवाल
मंडी समिति के एक कर्मचारी द्वारा अरसे से वसूली किए जाने के बावजूद मंडी समिति अधिकारियों द्वारा मौन साधे रखना कई तरह के गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। चर्चा है कि कर्मचारी द्वारा एक अधिकारी के साथ मिलीभगत कर ही इस तरह की वसूली की जा रही थी। मंडी समिति के इस अधिकारी ने ही कर्मचारी को ऐसा करने की छूट दे रखी थी। कुछ दिन पहले दुकानदारों ने मंडी समिति के संबंधित अधिकारी से इसकी शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने डांटकर भगा दिया था। ऐसे में इस अधिकारी की कार्य प्रणाली भी सवालों के घेरे में है।

ऐसे मिलता है लाइसेंस
मंडी समिति के वरिष्ठ लिपिक तुलसीराम ने बताया कि मंडी समिति में दुकान लगाने व लाइसेंस लेने के लिए स्वयं के नाम से एक हजार रुपये की एनएससी बनानी पड़ती है। इसे सचिव कृषि उत्पादन मंडी समिति अकबरपुर के नाम से बंधक रखा जाता है। संबंधित दुकानदार का एक पहचान पत्र, 251 रुपये लाइसेंस फीस के अलावा कारोबार की ढाई प्रतिशत धनराशि मंडी समिति कार्यालय में जमा करनी पड़ती है। कहा कि बगैर लाइसेंस वाले दुकानदारों को हटने के लिए कहा गया है।

मामले की कराई जाएगी जांच
मंडी समिति के कर्मचारी द्वारा दुकानदारों से अवैध रकम लेने का मामला जानकारी में लाया गया है। यह अत्यंत गंभीर प्रकरण है। इसकी जांच कराई जाएगी। निष्कर्षों के अनुरूप सभी जरूरी निर्णय लिए जाएंगे।
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- सुरेश कुमार, जिलाधिकारी
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