अंबेडकरनगर। जिले के विभिन्न स्थानों पर रामलीला का आयोजन सोमवार शाम को भी हुआ। अकबरपुर नगर व बरियावन में रामलीला शुभारंभ के मौके पर राम जन्म व रावण अत्याचार का मंचन हुआ, तो बसखारी में चल रहे रामलीला के छठवें दिन कलाकारों ने सीता हरण का भव्य मंचन किया। वहीं महरुआ थाना क्षेत्र के रितुरंग रामलीला समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय रामलीला के तीसरे दिन राम वनगमन का आकर्षक मंचन किया गया।
अकबरपुर नगर रामलीला के प्रथम दिवस के मौके पर मुकुट पूजा व नारद मोह आदि का मंचन कलाकारों ने कि या। लीला में दिखाया गया कि नारद तप में लीन रहते हैं। इसी बीच देवराज इंद्र को लगता है कि नारद उनका सिंहासन छीनने के लिए घोर तप कर रहे हैं। देवराज इंद्र के मन में एक विचार आया। वे कामदेव को बुलाकर नारद मुनि का तप भंग करने का आदेश देते हैं।
कामदेव नारद मुनि के पास पहुंच जाता है और तप में विघभन पैदा करने लगता है। तपस्या में लीन नारद मुनि का ध्यान टूट जाता है और वह कामदेव को श्राप दे देते हैं। बाद में कामदेव को अपनी भूल का ज्ञान होता है और वह नारद मुनि से क्षमा मांगता है। इस बात को लेकर नारद मुनि को कामदेव के जीतने का अहंकार हो जाता है।
वहीं बरियावन बाजार में बाल संघ रामलीला समिति के तत्वाधान में आयोजित रामलीला के पहले दिन भगवान राम के जन्म का मंचन हुआ। इसमें दिखाया गया कि राजा दशरथ गुरू वशिष्ठ की आज्ञा पाकर पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराने के लिए श्रृंगी ऋषि आश्रम पहुंचते हैं। अयोध्या में पूरे विधि विधान के साथ यज्ञ को पूर्ण किया जाता है। कालांतर में तीनों रानियों के द्वारा चार पुत्रों को जन्म दिया जाता है।
बसखारी प्रतिनिधि के अनुसार, रामलीला मंचन के छठवें दिन सीता हरण का मंचन किया गया। दिखाया गया कि रावण के दबाव के बाद मामा मारीच सीता को छल से लंका ले जाने के लिए रावण की सहायता करता है। वह सोने की मृग के रूप में परिवर्तित होकर भगवान राम के द्वारा बनाए गए कुटिया के आसपास विचरण करने लगता है।
भगवान राम के बाद लक्ष्मण के चले जाने पर माता सीता कुटिया में अकेली रह जाती हैं। उधर रावण समय का फायदा उठाकर साधु के वेश में आकर माता सीता को छल से अपने साथ लेकर चला जाता है। महरुआ प्रतिनिधि के अनुसार रामलीला के तीसरे दिन की लीला में भगवान राम पिता की आज्ञा पर वन की ओर प्रस्थान करते हैं। जिसे लेकर अयोध्या के नरनारी व्याकुल हो जाते हैं।