अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल की क्षमता है 100 बेड की। मौजूदा समय में भर्ती हैं 184 मरीज। क्षमता से कहीं अधिक मरीजों के भर्ती होने से जिला अस्पताल में इलाज व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। आलम यह है कि वार्डों में स्थान न होने पर गलियारे में बेड लगाकर मरीजों को भर्ती किया जाता है। सोने पर सुहागा यह कि जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या तो दिन प्रतिदिन बढ़ रही है, लेकिन लंबे समय स्टाफ की कमी के संकट को दूर करने को लेकर तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चिकित्सकों के 33 पद के सापेक्ष 11 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। मात्र 22 पर ही तैनाती है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर आए भी तो कैसे? जब क्षमता से अधिक मरीजों की भर्ती की जाएगी, तो इसका खामियाजा मरीजों को ही भुगतना पड़ेगा। जिला अस्पताल में 100 बेड की क्षमता है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने जब जिला अस्पताल का जायजा लिया, तो यहां बड़ी अव्यवस्था नजर आई। चार वार्ड व इमरजेंसी में कुल 184 मरीज भर्ती मिले। न सिर्फ वार्डों, बल्कि इमरजेंसी में भी क्षमता से अधिक बेड लगाए गए थे। इमरजेंसी के तीन वार्ड में ही 18 के सापेक्ष 22 मरीज भर्ती मिले। अन्य चार वार्डों में भी क्षमता से अधिक बेड लगाए गए थे। इसके अलावा गलियारे में बेड लगाकर मरीजों को भर्ती किया गया है। चिकित्सक के लिए मरीजों के साथ आए तीमारदार इधर-उधर भटकते दिखाई दिए। जलालपुर से आए तीमारदार फहीम ने कहा कि उसकी बहन के पेट में तेज दर्द हो रहा है। वह पिछले आधा घंटे से चिकित्सक से मिलने के लिए दौड़ रहा है, लेकिन अभी तक मुलाकात ही नहीं हो सकी है। बेवाना के राजेश ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वार्ड में स्थान न होने के चलते उनके मरीज को गलियारे में बेड लगाकर भर्ती कराया गया है। कहा कि मरीजों को समुचित इलाज सुनिश्चित हो सके, इसके लिए अस्पताल प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। क्षमता से अधिक मरीजों के भर्ती होने का खामियाजा आमतौर पर मरीजों व उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है।
लंबे समय से रिक्त चल रहे कई पद
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या तो दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन उसके सापेक्ष लंबे समय से चल रहे स्टाफ के संकट को दूर करने को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल चिकित्सक के 33 पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष 11 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। मात्र 22 पद पर ही तैनाती है। इसी प्रकार तृतीय श्रेणी कर्मचारी के 90 पद के सापेक्ष 68 पर तैनाती है। 22 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इसमें फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय, लिपिक आदि शामिल हैं। सबसे अधिक समस्या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 73 पद के सापेक्ष मात्र 10 पर ही तैनाती है। 63 पद रिक्त चल रहे हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा कितनी सुचारु है।
हैंडओवर की बाट जोह रहा 100 बेड का मातृ शिशु केंद्र
जिला अस्पताल परिसर में 100 बेड का मातृ शिशु केंद्र बनकर तैयार है। लंबे समय से हैंडओवर के इंतजार में है। यदि 100 बेड वाले इस केंद्र का संचालन शुरू होता है, तो इससे जिला अस्पताल पर लगातार बढ़ता मरीजों के दबाव में कुछ कमी आएगी। इसका लाभ भर्ती होने वाले मरीजों को मिलेगा।
उपलब्ध कराई जा रहीं सुविधाएं
स्टाफ की कमीं जरूर है, लेकिन जो भी स्टाफ है उसी से मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाते हैं। -डॉ. एसपी गौतम, सीएमएस