अभियंता पर करोड़ों के भुगतान को लेकर हस्ताक्षर का दबाव, लंबी छुट्टी पर
अंबेडकरनगर। बजट नहीं होने के बावजूद पौने आठ करोड़ रुपये के कार्यों के भुगतान की फाइल पर हस्ताक्षर का दबाव बनाने से क्षुब्ध जिला पंचायत के अभियंता अवकाश पर चले गए हैं।
अभियंता ने शासन को पत्र भेजकर कहा है कि, उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। जबकि ऐसा करना नियमानुसार संभव नहीं है।
अभियंता ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि, इन्हीं सब माहौल के चलते उनकी तबीयत खराब हो गई, जिससे उन्हें अंबेडकरनगर से अपने घर चले आना पड़ा।
जिला पंचायत में तैनात अभियंता अरविंद कुमार राय पर करोड़ों रुपये के कार्यों को लेकर अनियमित ढंग से दबाव डालने की खबर बुधवार को सामने आई।
उन्होंने जिला पंचायत प्रशासन के विरुद्घ मोर्चा खोल दिया है। अभियंता के मुताबिक उन्होंने शासन को पत्र भेजकर प्रकरण की शिकायत की है।
इसमें कहा गया कि वर्ष 2017-18 में उपलब्ध धन के सापेक्ष सात करोड़ 67 लाख रुपये के अतिरिक्त कार्यों का टेंडर निकाल दिया गया, जबकि इसके लिए धन नहीं था। नियमानुसार जितना धन रहता है, उसी के आसपास टेंडर निकाला जाता है।
अभियंता ने कहा कि, वित्तीय वर्ष बीतने के बाद अब उन कार्यों के सापेक्ष हस्ताक्षर करने के लिए उन पर लगातार दबाव डाला जा रहा है।
अभियंता ने शिकायत में हालांकि किसी का नाम नहीं लिया, लेेकिन उनका इशारा अपर मुख्य अधिकारी व अन्य पर ही है।
शिकायत में कहा गया कि वे लगातार कह रहे हैं कि संबंधित कार्यों को मौजूदा वित्तीय वर्ष में शामिल कर लिया जाए, तभी उनके द्वारा हस्ताक्षर करना संभव हो सकेगा।
पिछले वर्ष के कार्यों के आधार पर अब हस्ताक्षर करना संभव नहीं है। इसके बावजूद लगातार इस तरह घेराबंदी व दबाव डाला जा रहा।
अभियंता के मुताबिक, इसी दबाव व मानसिक तनाव के चलते उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अचानक अंबेडकरनगर से घर चले आना पड़ा।
अभियंता ने बताया कि, चिकित्सीय अवकाश के लिए उन्होंने पत्र दे रखा है। ये भी बताया कि शासन में की गई शिकायत के आधार पर जिला पंचायत से जवाब तलब किया गया है।
इस मामले में अपर मुख्य अधिकारी एके यादव ने कहा कि अभियंता का दरअसल यहां काम करने का मन नहीं है। बगैर बताए वे नदारद हो गए। अब ई-मेल से बीमारी का प्रार्थनापत्र भेजा है।
उन्हें इस पर दो नोटिस जारी किए गए हैं। इस वजह से मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं। एएमए ने कहा कि, कार्यों के टेंडर को लेकर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे मनगढ़ंत हैं।