अंबेडकरनगर। दावा है शहरी क्षेत्र में 24 घंटे व ग्रामीण क्षेत्र में साढ़े 18 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का लेकिन हकीकत में शहरी क्षेत्रों को बमुश्किल 18 तो ग्रामीण क्षेत्रों को 12 घंटे की ही आपूर्ति हो रही है। पावर कारपोरेशन के अनुसार ज्यादातर ट्रांसफार्मरों व फीडरों के ओवरलोडेड होने के चलते रोस्टर के मुताबिक आपूर्ति करने में दिक्कत हो रही है। इस बीच सप्ताह भर में 49 ट्रांसफार्मर फुंक गए।
जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते रोस्टर के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। शहरी क्षेत्रों को 24 घंटे जबकि ग्रामीण क्षेत्रों को साढ़े 18 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का रोस्टर है लेकिन हकीकत इससे कहीं परे है। शहरी क्षेत्रों को बमुश्किल 18 तो ग्रामीण क्षेत्रों को 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इसमें भी बार-बार की ट्रिपिंग से उपभोक्ताओं को जूझना पड़ता है।
सप्ताह भर में 10, 16, 25, 60 व 100 केवीए के कुल 49 ट्रांसफार्मर विभिन्न क्षेत्रों में फुंक गए। उधर अकबरपुर विद्युत उपकेंद्र का साउथ वेस्ट फीडर लंबे समय से ओवरलोडेड चल रहा है। इससे जुड़े उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली नहीं मिल रही है। विभाग के अनुसार अशरफपुर बरवां में उपकेंद्र निर्माणाधीन है, इसके संचालन के बाद साउथ वेस्ट फीडर का आधा लोड इस पर चला जाएगा जिससे उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली मिल सकेगी। अकबरपुर नगर को आपूर्ति करने वाले मरैला उपकेंद्र का एक फीडर भी ओवरलोडेड है। टांडा, आलापुर, भीटी, बसखारी व जलालपुर क्षेत्र के पांच अन्य उपकेंद्र भी ओवरलोडेड चल रहे हैं।
रोस्टर के अनुसार आपूर्ति पर जोर
रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति कराने पर जोर रहता है। फुंके ट्रांसफार्मरों को प्राथमिकता के आधार पर बदलवाया जाता है। अशरफपुर बरवां में उपकेंद्र का निर्माण चल रहा है। इसके संचालन के बाद साउथ वेस्ट फीडर का आधा लोड इस पर चला जाएगा। कई बार तार टूटने व सुुधार के कार्यों के चलते भी आपूर्ति बाधित होती रहती है। -एके यादव, अधिशाषी अभियंता, विद्युत निगम, अकबरपुर