अंबेडकरनगर। किसानों के गेहूं खरीद की राह में पैसे व बोरे का संकट बाधक बन गया है। नतीजा यह है कि तमाम किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों का रुख करने की बजाय आढ़तियों के हाथों औने-पौने दाम पर गेहूं की बिक्री शुरू कर दी है। किसानों को इससे आर्थिक चपत सहनी पड़ रही है। एक माह के भीतर लगभग 40 करोड़ की गेहूं खरीद हुई है, लेकिन ढाई करोड़ का भुगतान भी किसानों के बीच नहीं हो पाया है। 58 हजार 1 सौ मीट्रिक टन गेहूं खरीद लक्ष्य के सापेक्ष एक तिहाई से कुछ ज्यादा ही खरीद अब तक हो पाई है।
जिले में गेहूं खरीद को लेकर भले ही बढ़ चढ़कर दावे किए गए रहे हाें, लेकिन किसानों को इसका समुचित लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा। भुगतान में विलंब तथा बोरे की कमी के चलते किसानों ने मजबूरन आढ़तों की तरफ रुख करना शुरू किया है। हालांकि इसमें उन्हें आर्थिक चपत लग रही है, लेकिन तब भी आम तौर पर नगद भुगतान मिल जाने से उन्हें किसी खास समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा। गौरतलब है कि जिले में 58 हजार 1 सौ मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष अब तक 1 माह में 22 हजार 525 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा सका है। कुल 3793 किसानों के गेहूं की खरीद हुई है। इन्हें 39 करोड़ 30 लाख 67 हजार 706 रुपए दिया जाना था, लेकिन पीसीएफ के केंद्रों से जुडे़ 352 किसानों को 2 करोड़ 35 लाख रुपये तक का भुगतान अभी नहीं हो पाया है। नतीजा यह कि लगभग ढाई करोड़ के भुगतान के लिए संबंधित किसान जहां परेशान हो रहे वहीं इन्हीं हालातों को देखते हुए ही अन्य तमाम किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों से मुंह मोड़ रखा है। वहीं जिले के 96 केद्रों में से लगभग एक तिहाई केंद्रों पर बोरे का संकट बना हुआ है। 20 से अधिक केेंद्रों पर भंडारण की भी दिक्कत है। प्राथमिकता के आधार पर केंद्रों से खरीदे गए गेहूं की ढुलाई न हो पाने के चलते भी कई जगहों पर गेहूं की खरीद कर पाने में कर्मचारी खुद को असमर्थ पा रहे हैं। अमर उजाला ने गुरुवार को विभिन्न क्रय केंद्रों का जायजा लिया तो स्थिति अत्यंत चिंताजनक दिखी। पेश है अश्विनी मिश्र के साथ सुदीप शुक्ल, आरपी सिंह, कृष्ण कुमार कसौधन व चन्द्रकांत पांडेय की रिपोर्ट-
बोरे व पैसे दोनों का संकट
टांडा। क्रय केंद्र अरिया बाजार में गेहूं खरीद के लिए बोरे व पैसे दोनों का संकट बना हुआ है। केंद्र का गोदाम गत वर्ष ही जर्जर हो गया था। इस वर्ष गोदाम में गेहूं रखने पर बारिश होने के दौरान उसके प्रभावित होेने का खतरा था। मजबूरन गेहूं को एक निजी स्थान पर रखने की व्यवस्था कर्मचारियों के सामने बनी हुई है। केंद्र पर बोरे का संकट इस तरह है कि एक दिन पहले यहां तौल के लिए आई दो ट्रॉली को बोरे के अभाव में खड़ा कर किसानों को वापस लौटना पड़ा। यहां अब तक 32 लाख रुपए के गेहूं की खरीद हो चुकी है, लेकिन भुगतान सिर्फ 19 लाख रुपये का हुआ है। लगभग 13 लाख रुपए का भुगतान किसानों को होना अभी भी शेष है। केंद्र प्रभारी रामसुमेर वर्मा ने बताया कि अतिरिक्त धन की मांग की गई है। बोरा भी उपलब्ध हो रहा है।
एक भी किसान का नहीं हुआ भुगतान
कटेहरी। गेहूं क्रय केंद्र अशरफपुर बरवा से अब तक किसानों को गेहूं बिक्री का भुगतान नही मिल पाया है। अब तक सिर्फ 307 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। केंद्र पर सिर्फ 350 बोरा ही शेष बचा है। जल्द ही बोरे की खेप न पहुंची तो गेहूं खरीद का कार्य पूरी तरह ठप भी पड़ सकता है। एडीओ कोआपरेटिव विजय नारायण वर्मा के मुताबिक किसान बही व नकल आदि में कुछ दिक्कत थी, इसलिए भुगतान रुका था। एक-दो दिन में भुगतान कर दिया जाएगा। तीन बंडल बोरे की डिमांड की गई है, बोरा जल्द ही उपलब्ध हो जाएगा।
भंडारण संकट से ठप पड़ी खरीद
जलालपुर। साधन सहकारी समिति मैनुद्दीनपुर में भंडारण का संकट है। यहां अब तक 1300 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है। समिति को अब तक किसानों के बीच भुगतान के लिए 17 लाख रुपए प्राप्त हुए थे, जबकि 21 लाख रुपए से अधिक के गेहूं की खरीद हो चुकी है। लगभग चार लाख रुपए का भुगतान किसानों को किया जाना बाकी है। भंडारण की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण यहां बड़ी तादाद में गेहूं एकत्र हो गया है। इसके चलते खरीद का कार्य लगभग ठप सा पड़ गया है। बोरे का संकट यहां नहीं है। कुल 3500 बोरे प्राप्त हुए थे, जिनमें से अभी भी 900 बोरे बचे हुए हैं। सचिव रामकुमार ने बताया कि खरीदे गए गेहूं को स्टोर में भेजवाने का प्रबंध किया जा रहा है। सभी किसानों को भुगतान के लिए धन की मांग की गई है।
महरुआ में सुस्त पड़ी गेहूं की खरीद
महरुआ। गेहूं क्रय केंद्र महरुआ में गेहूं खरीद का कार्य गति नही पकड़ पा रहा। यहां बोरे से लेकर पैसे का संकट नही, लेकिन इसके बाद भी अब तक सिर्फ 17 किसान ही यहां गेहूं की बिक्री के लिए पहुंच सके हैं। इन्हीं चंद किसानों की बदौलत ही यहां एक माह में अब तक मात्र 700 क्विंटल खरीद हो पाई है। जबकि तीन हजार क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य मिला था। जाहिर तौर पर गेहूं खरीद को लेकर सुस्त रफ्तारी का माहौल है। केंद्र को भुगतान के लिए 9 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। इनमें से 6 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। केंद्र प्रभारी संदीप दुबे ने बताया कि जो भी किसान पहुंच रहे उनके गेहूं की खरीद की जा रही है।
तेजी से सुनिश्चित हो रही गेहूं की खरीद
लक्ष्य के सापेक्ष गेहूं की खरीद तेजी से सुनिश्चित कराई जा रही है। जिले में बोरे की कोई कमी नहीं है। शीघ्र ही बोरे की और रैक पहुुंच रही है। पीसीएफ से जुडे़ केंद्रों का दो करोड़ से अधिक पैसा भुगतान होना शेष है। एक-दो दिन में वह भी राशि मिल जाएगी। केंद्रों तक आने वाले किसानों के गेहूं खरीद पर प्रशासन का पूरा फोकस है। -अजीत सिंह, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी