मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर जोखिम में बच्चों की जान
अकबरपुर में ओवरब्रिज के नीचे की क्रॉसिंग सर्वाधिक संवेदनशील, जिम्मेदार नहीं गंभीर
जिले में हैं एक दर्जन रेलवे क्रॉसिंग, कहीं नहीं सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, हो चुके कई हादसे
स्कूल प्रबंधन एवं पुलिस व रेल प्रशासन भी बेपरवाह
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर बच्चों की जान जिले में भी लगभग प्रतिदिन जोखिम में रहती है। सबसे ज्यादा चिंता का सबब अकबरपुर नगर के मध्य स्थित ओवरब्रिज के नीचे की मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग है। यहां आधा दर्जन से अधिक स्कूलों के छात्र-छात्राएं क्रॉसिंग को सुबह व दोपहर बाद समूह में पार करते हैं। ऐसे में किसी भी दिन यहां बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ‘अमर उजाला टीम’ ने बृहस्पतिवार को सुबह अकबरपुर में ओवरब्रिज के नीचे स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूल आ-जा रहे बच्चों पर निगाह दौड़ाई तो पता चला कि किस तरह से जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं। खास बात यह कि जान जोखिम में डालकर क्रॉसिंग पार करने को लेकर न तो संबंधित बच्चों के अभिभावकों को कोई परवाह है, और न ही स्कूल प्रबंधन या फिर पुलिस विभाग को।
कुशीनगर में गुरुवार को मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर हुए हादसे में 13 बच्चों की जान जाने के बाद पूरे प्रदेश में मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा का मामला फिर से ताजा हो गया है। अंबेडकरनगर जिले में भी लगभग एक दर्जन मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग हैं। इनसे प्रतिदिन हजारों छात्र-छात्राएं पार होते रहते हैं। आम ग्रामीणों के साथ साथ इन छात्र-छात्राओं की जान भी जोखिम में बनी रहती है। लम्बे समय से ऐसे सभी स्थानों पर क्रॉसिंग निर्माण की मांग चली आ रही है, लेकिन अब तक पूरी नहीं हो पायी है। सबसे ज्यादा चिंता का सबब अकबरपुर नगर के मध्य स्थित ओवरब्रिज के नीचे की रेलवे क्रॉसिंग है। यहां लगभग प्रतिदिन सुबह व शाम सैकड़ों छात्र छात्राएं क्रॉसिंग पार कर स्कूल से आते जाते हैं। आधा दर्जन से अधिक स्कूल क्रॉसिंग से 300 मीटर की परिधि में हैं। इनमें कई स्कूल नर्सरी से संचालित हैं। ऐसे में नन्हे-मुन्ने बच्चों का आवागमन भी इधर से ही बना रहता है। सुबह के समय तो फिर भी बच्चे थोड़े अंतराल पर जाते हैं, लेकिन दोपहर बाद स्कूल में अवकाश होते ही अलग-अलग समय पर काफी देर तक क्रॉसिंग से बच्चों के गुजरने की लाइन लग जाती है। अब ऐसे में यदि कोई ट्रेन आ जाए तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। बच्चों के साथ यह खतरा यहां लगभग प्रतिदिन बना रहता है। ऐसी स्थिति के बावजूद न तो इसकी परवाह अभिभावकों को है, और न ही पुलिस व रेलवे प्रशासन को। जाहिर तौर पर किसी भी दिन यहां कुशीनगर जैसा ही कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
तीन वर्ष में हो चुके चार हादसे
मानवरहित रेलवे क्रॉसिंगों पर जिले में भी कई हादसे हो चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में अलग-अलग स्थानों पर कुल चार हादसे हुए हैं। लगभग ढाई वर्ष पूर्व दुल्लापुर गांव के पास मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रैक्टर-ट्रॉली ट्रेन से टकरा गई थी। इसमें ट्रॉली के परखच्चे उड़ गए थे। गनीमत रही कि चालक समय रहते ट्रैक्टर छोड़कर फरार हो गया था। हालांकि अब संबंधित स्थान पर फाटक लग गया है। अरियौना गांव के निकट भी करीब दो वर्ष पूर्व बड़ा हादसा होते-होते बच गया था। गांव के पास रेलवे क्रॉसिंग पार करने के दौरान एक युवक की बाइक पटरियों के बीच फंस गई थी। इस मामले में समय रहते ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर उसे बचा लिया था। कोटवा महमदपुर गांव को जाने वाले रेलवे क्रॉसिंग पर भी एक वर्ष पूर्व बड़ा हादसा होते-होते बचा था। टांडा जा रही मालगाड़ी ने एक कार को अपनी चपेट में ले लिया था। गाड़ी में बैठे लोग समय रहते कूद कर अपनी जान बचाने में कामयाब रहे थे। अकबरपुर नगर के मध्य स्थित रेलवे क्रासिंग पर भी आए दिन असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
जिले में हैं 12 रेलवे क्रॉसिंग
अंबेडकरनगर। जिले में कुल एक दर्जन स्थानों पर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग है। इनमें जिला मुख्यालय पर ओवरब्रिज के नीचे नागरिकों द्वारा प्रयोग में लायी जा रही वैकल्पिक क्रॉसिंग भी शामिल है। इसके अलावा कोटवा महमदपुर, अरिया, टांडा, जाफरगंज, मालीपुर, अरियौना, निनामपुर, लोकापुर, कटेहरी व सूरापुर आदि शामिल हैं। इन क्षेत्रों में स्थित मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग से गुजरना प्रतिदिन हजारों लोगों के लिए जान जोखिम में बनाए रहता है। स्थानीय नागरिकों द्वारा दशकों पूर्व से इन स्थानों पर फाटक लगाए जाने की मांग की जा रही है।
समझनी होगी सभी को जिम्मेदारी
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि स्कूल संचालकों के साथ ही अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। शार्ट कट के प्रयास में बच्चों की जान जोखिम में डालना ठीक नहीं। व्यवसायी नरेन्द्र जायसवाल ने कहा कि पुलिस प्रशासन को क्रॉसिंग के पास सुबह व दोपहर बाद दो-दो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगानी चाहिए, जो बच्चों को खतरे से बचा सकें।
स्कूलों को दिए जा रहे निर्देश
स्कूल प्रबंधनों को नए सिरे से निर्देश दिए जा रहे हैं। मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग से होकर गुजरने में स्कूल वाहनों के चालक खास सतर्कता बरतें। यह भी निर्देशित किया जा रहा कि वाहन चलाते समय कोई भी चालक यदि मोबाइल या लीड का प्रयोग करते पाया गया तो वैधानिक कार्रवाई होगी। इसमें स्कूलों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। -गिरिजेश त्यागी, एडीएम